किताबों के साथ अब पौधों की भी सीख, बच्चों को बांटे हरसिंगार के पौधे

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बच्चों के बीच किया गया पौधा वितरण.

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काजीगांव स्थित प्रूडेंट स्टडी सेंटर में बच्चों को हरसिंगार के पौधे बांटे गए. शिक्षकों ने पौधों के धार्मिक, पर्यावरणीय और औषधीय महत्व समझाते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. बच्चों ने अपने घरों में पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया.

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प्रतिनिधि, तीनपहाड़ .राजमहल प्रखंड क्षेत्र के काजीगांव स्थित प्रुडेट स्टडी सेंटर में बच्चों के बीच हरसिंगार (पारिजात) के पौधों का वितरण किया गया. शिक्षक प्रवीर कुमार सिंह ने बच्चों को पौधे वितरित करते हुए प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. इस दौरान उन्होंने बच्चों को हरसिंगार के धार्मिक, पर्यावरणीय और औषधीय महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

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हरसिंगार को बताया धार्मिक और औषधीय रूप से महत्वपूर्ण

शिक्षक प्रवीर कुमार सिंह ने बताया कि हरसिंगार को धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र पौधा माना जाता है. इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण और शुद्धिकरण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने बच्चों को बताया कि हरसिंगार के फूल और पत्तों का औषधीय उपयोग भी किया जाता है.

उन्होंने बच्चों से कहा कि पौधे केवल प्रकृति की खूबसूरती नहीं बढ़ाते, बल्कि पर्यावरण को संतुलित रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. इसलिए पौधा लगाने के साथ उसकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी जरूरी है.

पौधा देकर बच्चों को दिलाया संरक्षण का संकल्प

पौधा वितरण के दौरान शिक्षक ने बच्चों को अपने-अपने घरों में हरसिंगार का पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प दिलाया. बच्चों ने भी पौधे को सुरक्षित रखने और उसके संरक्षण का संकल्प लिया.

शिक्षक ने कहा कि बच्चों में प्रकृति के प्रति लगाव पैदा करने के लिए इस तरह की पहल जरूरी है. बचपन से ही पर्यावरण संरक्षण की आदत विकसित होने पर आने वाली पीढ़ी प्रकृति के प्रति अधिक जिम्मेदार बनेगी.

लगातार पौधरोपण का संदेश दे रहे शिक्षक

गौरतलब है कि शिक्षक प्रवीर कुमार सिंह लगातार पौध वितरण और पौधरोपण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को प्रकृति से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. वह बच्चों को पौधे देकर उन्हें लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण और संवर्धन के लिए भी प्रेरित करते हैं.

उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल अभियान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है. बच्चों के माध्यम से घर-घर तक पौधरोपण और संरक्षण का संदेश पहुंचाया जा सकता है.

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