RIMS में डॉक्टरों ने क्यों बंद किया काम? मरीजों की OPD और इलाज पर कितना पड़ा असर, जानें पूरा मामला
RIMS कॉलेज (PC-ऑफिशियल वेबसाइट)
रांची के रिम्स अस्पताल में मरीज की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों से मारपीट की. घटना के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टरों ने दो घंटे तक काम बंद रखा, जिससे चिकित्सा सेवाएं बाधित हुईं. अस्पताल प्रशासन से सुरक्षा की मांग की गई.
रांची. राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में रविवार को मरीज की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ. सर्जरी विभाग के सीआइटीयू वार्ड में इलाज के दौरान मरीज की मौत से नाराज परिजनों ने ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टरों के साथ कथित तौर पर मारपीट की. घटना के विरोध में रिम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने करीब दो घंटे तक काम बंद रखा. डॉक्टरों ने अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की. अधिकारियों की ओर से सुरक्षा को लेकर आश्वासन मिलने के बाद डॉक्टर काम पर लौटे.
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गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था मरीज
रिम्स जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार के अनुसार, मरीज को रविवार को गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मरीज को गंभीर पैंक्रियाटाइटिस की समस्या थी और उसकी हालत पहले से नाजुक थी. डॉक्टरों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन इलाज के दौरान सर्जरी वार्ड में उसकी मौत हो गयी.
मरीज की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हो गये. आरोप है कि उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए उनके साथ मारपीट शुरू कर दी. रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों पर डंडे से भी हमला किया गया. घटना के बाद अस्पताल में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गयी.
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दो घंटे तक काम से दूर रहे रेजिडेंट डॉक्टर
डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटना के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध जताते हुए करीब दो घंटे तक काम बंद रखा. डॉक्टरों का कहना था कि अस्पताल में ड्यूटी के दौरान उनकी सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी रहती है. उनका आरोप है कि रिम्स परिसर में डॉक्टरों के साथ चोरी और अन्य अप्रिय घटनाएं भी होती रहती हैं.
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अस्पताल के अंदर ही नहीं, बल्कि पूरे रिम्स परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की. डॉक्टरों का कहना था कि मरीजों के इलाज के दौरान यदि किसी तरह की अप्रिय घटना होती है, तो ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी अस्पताल प्रशासन की होनी चाहिए.
आश्वासन के बाद फिर शुरू किया काम
विरोध के दौरान अस्पताल प्रशासन की ओर से डॉक्टरों को सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने का आश्वासन दिया गया. इसके बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने करीब दो घंटे बाद काम शुरू कर दिया. इससे चिकित्सा सेवाएं दोबारा सामान्य करने की कोशिश की गयी. हालांकि, डॉक्टरों के विरोध के कारण कुछ समय के लिए मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा.
रिम्स राज्य का प्रमुख सरकारी अस्पताल है और यहां झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में डॉक्टरों और मरीजों के बीच विवाद या चिकित्सकों के काम से हटने की स्थिति का सीधा असर चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ता है.
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सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल
इस घटना ने रिम्स की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिये हैं. इससे पहले भी अस्पताल परिसर में चोरी और सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं सामने आती रही हैं. हाल में रिम्स में 1300 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद न्यूरो सर्जरी आइसीयू और लेबर रूम के एसी के कॉपर पाइप चोरी होने की खबर सामने आयी थी.
ऐसे में डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटना के बाद चिकित्सक संगठनों की ओर से अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने की मांग उठायी गयी है. डॉक्टरों का कहना है कि भयमुक्त माहौल में ही वे मरीजों का बेहतर इलाज कर सकते हैं. घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से स्थिति सामान्य रखने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कदम उठाने का आश्वासन दिया गया है.
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