कांग्रेस में वापसी के 3 महीने बाद फिर योगेंद्र साव को नोटिस, 3 दिन में देना होगा जवाब

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कांग्रेस नेता योगेंद्र साव एक बार फिर पार्टी के अनुशासन के घेरे में हैं। वापसी के तीन महीने बाद उन्हें सार्वजनिक बयानों को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्हें तीन दिन के भीतर जवाब देना होगा।

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रांची. पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव की पार्टी में वापसी के करीब तीन महीने बाद फिर अनुशासन का मामला सामने आया है. प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने उनके हालिया सार्वजनिक बयानों को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है. समिति के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव की ओर से जारी नोटिस में साव से तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने और स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है.

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नोटिस में पूछा गया है कि पार्टी संविधान के प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाये. कांग्रेस के अनुसार, साव के हालिया बयान पार्टी के सिद्धांतों और नेतृत्व के निर्देशों के विपरीत माने गये हैं. अभी उनके खिलाफ कोई अंतिम अनुशासनात्मक फैसला नहीं हुआ है.

पहले भी हो चुकी है अनुशासनात्मक कार्रवाई

योगेंद्र साव इससे पहले भी कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर चुके हैं. मार्च 2026 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी के मामले में उन्हें तीन साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया था. इसके बाद 25 जून 2026 को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने उनका निष्कासन रद्द कर दिया था.

जून में निष्कासन रद्द होने के करीब तीन महीने बाद अब पार्टी ने उनके खिलाफ फिर कारण बताओ नोटिस जारी किया है. अनुशासन समिति ने नोटिस में पूर्व की कार्रवाई का भी उल्लेख किया है और हालिया बयानों को गंभीरता से लेने की बात कही है.

तीन दिन में जवाब, समिति के सामने भी पेशी

साव को लिखित जवाब देने के साथ अनुशासन समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है. इसके बाद समिति उनके स्पष्टीकरण पर विचार करेगी और आगे की कार्रवाई के संबंध में फैसला लेगी. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि समिति उनके खिलाफ क्या निर्णय लेगी.

कांग्रेस-जमुमो गठबंधन के बीच मामला महत्वपूर्ण

योगेंद्र साव के हालिया बयानों को लेकर कांग्रेस की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई की पहल ऐसे समय हुई है, जब पार्टी झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में सहयोगी है. इसलिए मामला कांग्रेस के संगठनात्मक अनुशासन के साथ गठबंधन की राजनीति से भी जुड़ा हुआ है. हालांकि, साव के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी, यह उनके जवाब और अनुशासन समिति के अगले निर्णय पर निर्भर करेगा.

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