सब्जी बेचने वाले की बेटी ने रच दिया इतिहास! UGC NET में 92.57 परसेंटाइल, DSPMU में भी टॉपर
डीएसपीएमयू के आईटी विभाग की टीचर डॉ आंचल कुमारी. फोटो: प्रभात खबर
रामगढ़ की डॉ. आंचल कुमारी, जिनके माता-पिता सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, ने UGC NET जून 2026 परीक्षा में कंप्यूटर साइंस में 92.57 परसेंटाइल अंक हासिल कर एक मिसाल कायम की है. उनकी सफलता शिक्षा के प्रति समर्पण और पारिवारिक समर्थन का प्रमाण है.
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रांची से संजीव सिंह की रिपोर्ट
UGC NET 2026 Result: सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच बड़े सपने देखने वालों के लिए रामगढ़ की डॉ आंचल कुमारी की सफलता एक प्रेरक मिसाल बन गई है. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग की शिक्षिका डॉ आंचल ने यूजीसी-नेट जून 2026 परीक्षा में कंप्यूटर साइंस विषय में 92.57 परसेंटाइल के साथ 168 अंक हासिल किए हैं. खास बात यह है कि उनके माता-पिता सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और उसी संघर्ष ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया.
डीएसपीएमयू की टॉपर से यूजीसी-नेट तक का सफर
डॉ आंचल ने अपनी स्नातक (बीएससी आईटी) और स्नातकोत्तर (एमसीए) की पढ़ाई डीएसपीएमयू से ही पूरी की. वह सत्र 2018-21 में विश्वविद्यालय की टॉपर रहीं. उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें तत्कालीन झारखंड के राज्यपाल और वर्तमान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के हाथों स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था. अब यूजीसी-नेट में शानदार प्रदर्शन ने उनकी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है.
सब्जी बेचकर बच्चों को पढ़ाया, संघर्ष बना ताकत
रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड की सांकूल पंचायत निवासी डॉ आंचल ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने माता-पिता को दिया है. उनके पिता विनोद साहू और मां बासंती देवी वर्षों से सब्जी बेचकर परिवार की आजीविका चलाते रहे हैं. आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी. आंचल का कहना है कि माता-पिता ने कठिन से कठिन हालात में भी शिक्षा को प्राथमिकता दी और वही उनके आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा बनी.
पूरा परिवार बना शिक्षा का उदाहरण
डॉ आंचल का परिवार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उपलब्धियां हासिल कर रहा है. उनके दोनों भाई अनिकेत कुमार और अभिषेक कुमार भी बीएससी आईटी में टॉपर रह चुके हैं. आंचल का मानना है कि परिवार का सकारात्मक माहौल और पढ़ाई के प्रति समर्पण ने उन्हें हमेशा बेहतर करने के लिए प्रेरित किया. उनका कहना है कि घर में संघर्ष जरूर था, लेकिन हौसलों की कभी कमी नहीं रही.
पति, ससुराल और शिक्षकों का मिला पूरा साथ
डॉ आंचल ने बताया कि यूजीसी-नेट की तैयारी और शोध कार्य के दौरान उन्हें अपने पति, सास-श्वसुर, शिक्षकों और भाइयों का लगातार सहयोग मिला. परिवार के भरोसे और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने कठिन तैयारी को आसान बना दिया. उनका मानना है कि किसी भी बड़ी सफलता के पीछे केवल व्यक्तिगत मेहनत ही नहीं, बल्कि परिवार और गुरुजनों का विश्वास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
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सफलता पर बधाइयों का तांता
डॉ आंचल की इस उपलब्धि पर डीएसपीएमयू और शिक्षा जगत में खुशी का माहौल है. डॉ आईएन साहू, डॉ राजेंद्र कुमार महतो, डॉ राहुल देव साह, उदय साहू, रेखा देवी, अनुज कुमार, डॉ शैली, शैलेश कुमार और अभिषेक कुमार सहित कई शिक्षकों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी है. उनकी सफलता को ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक माना जा रहा है.
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