स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए कितना तैयार है रांची का सदर अस्पताल? नए सिविल सर्जन ने बताया पूरा प्लान
रांची के सिविल सर्जन डॉ अमरेंद्र प्रसाद प्रेस वार्ता करते हुए
रांची में स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है. नए सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने न सिर्फ जिले की मौजूदा स्थिति पर जानकारी दी, बल्कि अपनी भविष्य की योजनाओं का भी खुलासा किया है.
रांची से अभिषेक आनंद की रिपोर्ट
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रांची : राजधानी रांची में स्वाइन फ्लू के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है. हाल ही में गत 1 अगस्त को रांची के नए सिविल सर्जन के रूप में पदभार संभालने वाले डॉ अमरेंद्र प्रसाद ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद 29वें दिन पत्रकारों से बातचीत में जिले की स्वाइन फ्लू की स्थिति और अपनी भावी कार्ययोजनाओं को साझा किया. उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू को लेकर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. अब तक प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार केवल पारस अस्पताल में एक मामला सामने आया है. कुल 11 संदिग्धों की जांच कराई गई थी, जिनमें से 8 लोग स्वाइन फ्लू से संक्रमित पाए गए हैं. हालांकि सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में यह संक्रमण गंभीर या जानलेवा रूप में नहीं है और इसका प्रबंधन होम आइसोलेशन में ही सुचारू रूप से किया जा रहा है. मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की नौबत नहीं आई है, फिर भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सदर अस्पताल में 10 बेड का विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार कर लिया गया है.
सिविल सर्जन ने बताया अपना विजन प्लान
सिविल सर्जन डॉ अमरेंद्र प्रसाद ने पदभार संभालने के बाद शनिवार को अपने भविष्य के रोडमैप पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि रांची जिला में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने 6-6 महीने का एक विशेष विजन प्लान तैयार किया है. इसके तहत सदर अस्पताल में कैथ लैब (Cath Lab), पेट स्कैन (PET Scan), टेली आईसीयू/टेली एसेंशियल्स और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू करने की योजना है. इसके साथ ही वे सदर अस्पताल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उपाधीक्षक (DS) के साथ मिलकर टीम भावना से काम कर रहे हैं. ग्रामीण और बाहरी क्षेत्रों के सामुदायिक (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को सुदृढ़ करना उनकी प्राथमिकता है और आगामी दिसंबर माह तक सभी स्वास्थ्य केंद्रों का गहन निरीक्षण कर वहां डिजिटल एक्स-रे समेत अन्य बुनियादी कमियों को दूर कर लिया जाएगा.
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निजी अस्पतालों के लाइसेंस की होगी व्यापक समीक्षा
निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और लाइसेंस से जुड़ी शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए डॉ अमरेंद्र प्रसाद ने कहा कि पुरानी चली आ रही व्यवस्था की समीक्षा कर उसे पूरी तरह बदला जाएगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे. उन्होंने स्वीकार किया कि मीडिया के माध्यम से क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत लाइसेंस नवीनीकरण और पेनाल्टी बैकलॉग से जुड़ी समस्याएं संज्ञान में आई हैं. इसके लिए जल्द ही एक स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाकर समीक्षा की जाएगी और नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाएगा. इसके अलावा एंबुलेंस सेवाओं से जुड़ी चुनौतियों को भी जल्द ही राज्य सरकार के सहयोग से हल कर लिया जाएगा.
अस्पताल परिसर में संक्रमण रोकने के लिए गाइडलाइन जारी
सदर अस्पताल परिसर में मीडिया की आवाजाही और संक्रमण नियंत्रण को लेकर सिविल सर्जन ने स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि मीडिया पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और इंफेक्शन कंट्रोल (संक्रमण की रोकथाम) के उद्देश्य से एक व्यवस्था बनाई गई है. वे कहते हैं कि आईसीयू, एचडीयू और संवेदनशील वार्डों के भीतर बेड तक कैमरे और पत्रकारों के जाने से मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है. उन्होंने मीडियाकर्मियों से अपील की है कि वे इमरजेंसी वार्ड के बाहर या गैलरी में बाइट व इंटरव्यू लें. उन्होंने जोर देकर कहा कि मास्क पहनना और संवेदनशील वार्डों में जाने से बचना किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि मरीजों से मिलने आने वाले सभी परिजनों और आम लोगों पर समान रूप से लागू होता है.
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