2017 में सुदिव्य सोनू के इस एक वाक्य ने बदली झारखंड की सियासत, जानें 2019 के सत्ता परिवर्तन की इनसाइड स्टोरी

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सुदिव्य कुमार सोनू की फाइल फोटो

जानें कैसे 2017 में दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के एक हिंदी वाक्य ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की रणनीति को पूरी तरह बदल दिया. इस वाकये ने 2019 में पार्टी की जीत की नींव रखी.

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रांची : झारखंड सरकार के दिवंगत मंत्री और गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू संघर्ष से उपजे राजनेता थे ये तो हर कोई जानता है. लेकिन क्या आपको पता है कि वे झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की भावी रणनीतियों के सबसे बड़े सूत्रधारों में से एक थे. उनके असमयिक निधन के बाद राजनीतिक जीवन से जुड़े कई ऐसे ऐतिहासिक किस्से सामने आ रहे हैं, जिन्होंने राज्य की राजनीति की दिशा ही बदल दी. ऐसा ही एक घटना साल 2017 की है, जब बीजेपी की तत्कालीन रघुवर दास सरकार के खिलाफ झामुमो ने अपनी ऐतिहासिक 'संघर्ष यात्रा' की रूपरेखा तैयार की थी. एक निजी यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में सुदिव्य सोनू ने खुद इसका खुलासा किया था कि कैसे उस यात्रा ने 2019 में झामुमो की सत्ता में वापसी की बुनियाद रखी थी.

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जन-जन तक हेमंत सोरेन की पहुंच बनाने का था प्लान

सुदिव्य सोनू ने एक निजी यूट्यूब चैनल से हुए साक्षात्कार के दौरान बताया था कि वर्ष 2017 में प्लान की गई 'संघर्ष यात्रा' का मुख्य उद्देश्य केवल रघुवर सरकार के विरोध में नहीं था, बल्कि पार्टी के भीतर एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव लाना भी था. इस यात्रा का मुख्य मकसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नेतृत्व को सीएम हेमंत सोरेन की तरफ शिफ्ट करके जनता के बीच उनसे सीधा संवाद कायम करना था. झामुमो नेतृत्व चाहता था कि राज्य की जनता हेमंत सोरेन को गुरु जी के सक्षम राजनीतिक वारिस और भविष्य के मुख्यमंत्री के रूप में देखे. इसी सोच के तहत पूरे राज्य में व्यापक जन-संपर्क अभियान का खाका तैयार किया गया था.

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हिंदी साहित्य की वो पंक्ति, जिसने बदल दी पार्टी की सोच

इंटरव्यू में सुदिव्य सोनू ने 'संघर्ष यात्रा' का पूरा खाका और शिबू सोरेन की मंजूरी के लिए बुलाई गई पार्टी की बैठक का भी जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि यात्रा के अप्रूवल पर चर्चा चल रही थी, तब उन्होंने खुद (सुदिव्य सोनू) ने बैठक में उपस्थित शीर्ष नेताओं के सामने हिंदी साहित्य की एक मशहूर पंक्ति कही. उन्होंने कहा- "शांति काल में जो सेनाएं खंदक खोदने में पसीना बहाती हैं, युद्ध काल में उन्हें कम खून बहाना पड़ता है." उनके इस वाक्य ने पूरी बैठक का माहौल बदल दिया और पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया. इसी पंक्ति से प्रेरित होकर झामुमो ने 'संघर्ष यात्रा' पर निकाली. यही आगे चलकर 2019 के विधानसभा चुनाव में रघुवर सरकार को उखाड़ फेंकने और हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो की प्रचंड जीत का कारण बना था.

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