सुदिव्य कुमार सोनू ही नहीं, हेमंत सरकार में इससे पहले भी 3 मंत्रियों का हो चुका है निधन; जानें कौन थे वे नेता
हेमंत सरकार के चार मंत्रियों के निधन की दुखद कहानी
झारखंड की राजनीति में एक अजीब संयोग चर्चा में है. हेमंत सोरेन सरकार में अब तक चार मंत्रियों का निधन हो चुका है, जिनमें से तीन का सीधा संबंध शिक्षा विभाग से रहा है.
Jharkhand Ministers Death: झारखंड की राजनीति से रविवार 6 सितंबर को सुबह एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे राज्य को सन्न कर दिया है. हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री और गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक निधन हो गया है. महज 54 साल की उम्र में एक हार्ट अटैक ने झारखंड से उसका एक मजबूत और जमीनी नेता छीन लिया.
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इस दुखद खबर के साथ ही झारखंड की सियासत में एक ऐसा अजीब और खौफनाक संयोग फिर से चर्चा में आ गया है, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे. हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री रहते हुए अब तक कैबिनेट के चार मंत्रियों का निधन हो चुका है और सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि इन चार में से तीन मंत्रियों का सीधा कनेक्शन सिर्फ एक विभाग से रहा है— 'शिक्षा विभाग'!
आखिर कौन हैं ये चार मंत्री? और क्या है इस पूरे संयोग की कहानी?
हाजी हुसैन अंसारी
सबसे पहले बात करते हैं हाजी हुसैन अंसारी की. हाजी हुसैन अंसारी मधुपुर से विधायक थे और हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री थे. साल 2020 में कोरोना संक्रमण के बाद उनका निधन हो गया था. उनके निधन के बाद मधुपुर सीट पर उपचुनाव हुआ और उनके बेटे हफीजुल हसन अंसारी चुनाव जीतकर राजनीति में आगे आए.

जगरनाथ महतो
इसके बाद नाम आता है जगरनाथ महतो का. जगरनाथ महतो डुमरी से विधायक और हेमंत सोरेन सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे. कोरोना संक्रमण के बाद उनकी तबीयत काफी खराब हुई थी. उनका इलाज लंबे समय तक चला और फेफड़े का ट्रांसप्लांट भी हुआ था. लेकिन 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. जगरनाथ महतो झारखंड की राजनीति में एक मजबूत और जमीनी नेता के तौर पर पहचाने जाते थे. उनके निधन के बाद डुमरी सीट पर उपचुनाव हुआ और उनकी पत्नी बेबी देवी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं.

रामदास सोरेन
इसके बाद साल 2025 में एक और बड़ा झटका लगा. रामदास सोरेन. रामदास सोरेन घाटशिला से विधायक थे और हेमंत सोरेन की सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. 15 अगस्त 2025 को उनका निधन हो गया. यानी जगरनाथ महतो के बाद एक बार फिर झारखंड के शिक्षा विभाग से जुड़े मंत्री का निधन हुआ. रामदास सोरेन के निधन पर राज्य में राजकीय शोक भी घोषित किया गया था.

सुदिव्य कुमार सोनू
अब, साल 2026 में फिर वही दुखद सिलसिला चर्चा में है. सुदिव्य कुमार सोनू. गिरिडीह से विधायक सुदिव्य कुमार सोनू हेमंत सोरेन सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री थे. इसके अलावा उनके पास पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य और नगर विकास एवं आवास जैसे विभागों की जिम्मेदारी भी थी. लेकिन सुदिव्य कुमार सोनू की कहानी सिर्फ मंत्री बनने तक की नहीं है. उनका राजनीतिक सफर एक साधारण JMM कार्यकर्ता के तौर पर शुरू हुआ था. कभी वह दीवार लेखन करते थे, पोस्टर लगाते थे और पार्टी का झंडा लेकर गांव-गांव घूमते थे. साल 1989 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की सदस्यता ली और संगठन के लिए काम करना शुरू किया. बाद में 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर कमेटी का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया और फिर पार्टी में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए वह गिरिडीह जिला अध्यक्ष तक पहुंचे. चुनावी राजनीति में भी उनका सफर आसान नहीं था. 2009 में उन्होंने पहली बार गिरिडीह विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली. 2014 में वह फिर मैदान में उतरे और दूसरे नंबर पर रहे. फिर 2019 में JMM ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और इस बार उन्होंने गिरिडीह सीट जीत ली. 2024 में भी उन्होंने अपनी जीत बरकरार रखी और दूसरी बार विधायक बने. इसके बाद हेमंत सोरेन सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया. यानी जिस नेता ने कभी पार्टी के लिए दीवारों पर नारे लिखे, गांव-गांव जाकर संगठन का काम किया, वही नेता आगे चलकर झारखंड सरकार में मंत्री बना, लेकिन आज उनका सफर अचानक खत्म हो गया.

हेमंत सरकार में अब तक चार मंत्रियों का निधन
हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अब तक चार मंत्रियों का निधन हो चुका है. इनमें हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और अब सुदिव्य कुमार सोनू शामिल हैं.
इनमें जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से जुड़े रहे, जबकि सुदिव्य कुमार सोनू उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री थे. यानी करीब साढ़े तीन साल के भीतर झारखंड सरकार के शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का निधन हो चुका है. यह किसी तरह का दावा या किसी कारण को बताने की बात नहीं है, बल्कि झारखंड की राजनीति में सामने आया एक बेहद दुखद संयोग है। एक तरफ जेएमएम ने अपना एक वरिष्ठ और जमीनी नेता खो दिया है, तो दूसरी ओर हेमंत सोरेन सरकार के लिए भी यह एक बड़ा राजनीतिक और व्यक्तिगत झटका है.
सुदिव्य कुमार सोनू को अंतिम विदाई देने के लिए आज गिरिडीह में बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं और पूरे झारखंड में शोक की लहर है. कैमरे पर अब सुदिव्य कुमार सोनू नहीं होंगे, लेकिन एक साधारण कार्यकर्ता से मंत्री तक का उनका सफर और पार्टी के लिए उनका लंबा संघर्ष झारखंड की राजनीति में हमेशा याद किया जाएगा.
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