झारखंड के चार बालू घाटों की पर्यावरण मंजूरी नये संचालकों को हस्तांतरित
झारखंड राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण ने राज्य के चार बालू घाटों की पर्यावरणीय मंजूरी नए संचालकों के नाम हस्तांतरित करने की अनुमति दे दी है।
रांची : झारखंड राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) ने राज्य के चार बालू घाटों की पर्यावरणीय मंजूरी नये संचालकों के नाम हस्तांतरित करने की अनुमति दी है. यह निर्णय सिया की 133वीं बैठक में लिया गया. जिन बालू घाटों की मंजूरी हस्तांतरित की गयी है, उनमें सरायकेला-खरसावां जिले का सोरो (जोरगोदिह), सिमडेगा का देवबहागिंद्रा-बागडेगा, पलामू का कांके खुर्द और गढ़वा जिले का नॉर्थ कोयल बालू घाट-8 शामिल हैं.
सरायकेला-खरसावां के 4.90 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थित सोरो (जोरगोदिह) बालू घाट की पर्यावरणीय मंजूरी गो क्वेस्ट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के नाम हस्तांतरित की गयी है. सिमडेगा के 4.32 हेक्टेयर के देवबहागिंद्रा-बागडेगा बालू घाट की मंजूरी उजित राम के नाम की गयी है.
पलामू के 4.08 हेक्टेयर के कांके खुर्द बालू डिपॉजिट की पर्यावरणीय मंजूरी ऋषि राज कंस्ट्रक्शन के नाम हस्तांतरित हुई है. वहीं गढ़वा के 4.38 हेक्टेयर के नॉर्थ कोयल सैंड घाट-8 की मंजूरी भी ऋषि राज कंस्ट्रक्शन के नाम की गयी है.
लातेहार में कोयला वॉशरी को मंजूरी
बैठक में लातेहार के बालूमाथ स्थित ओलहेपाट में 7.48 हेक्टेयर क्षेत्र में 2.48 एमटीपीए क्षमता की वेट कोयला वॉशरी स्थापित करने के प्रस्ताव को भी पर्यावरण मंजूरी दी गयी. इसके अलावा 460 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली तुबेद कोल माइंस के लिए रेलवे साइडिंग से जुड़ी शर्त में संशोधन किया गया.
परियोजना प्रबंधक डीवीसी को 26 अक्तूबर 2026 तक रेलवे प्राधिकरण से स्वीकृत डीपीआर जमा करना होगा.
पत्थर खनन परियोजनाओं पर भी फैसला
सिया की बैठक में दो पत्थर खनन परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी देने का निर्णय लिया गया. वहीं दो चाकरबराई पत्थर परियोजनाओं को टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) देने का फैसला हुआ.
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