रांची में शराब फैक्ट्री पर छापा, राजद नेता और बिहार के पूर्व MLC सुबोध राय समेत तीन गिरफ्तार

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छापेमारी करती टीम. सांकेतिक तस्वीर (AI Image)

Ranchi Liquor Factory Raid: झारखंड के रांची में शराब फैक्ट्री में मंगलवार रात को छापेमारी हुई. छापेमारी में 303 पेटी विदेशी शराब जब्त की गई. इस मामले में राजद नेता और पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर बुधवार की शाम को जेल भेज दिया.

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Ranchi Liquor Factory Raid: रांची पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम ने मंगलवार की रात में ओरमांझी स्थित तरंगनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड में छापेमारी की. यह कंपनी राजद नेता और बिहार के एमएलसी रहे सुबोध राय की है. मौके पर ही सुबोध राय, उनके चालक देवेंद्र भगत और एक अन्य कर्मी रविकांत राय को छापेमारी दल ने गिरफ्तार कर लिया. आरोप है कि प्लांट में तैयार शराब पर दूसरे नामी ब्रांड के फर्जी लेबल लगाकर इसे बजार में आधे दाम पर खपाया जा रहा था. गिरफ्तारी के बाद बुधवार की शाम सबको बिरसा मुंडा जेल भेज दिया गया. छापेमारी दल का नेतृत्व सहायक उत्पाद आयुक्त उमाशंकर सिंह कर रहे थे. छापेमारी देर रात 12 बजे की गई और सुबह छह बजे तक चली. 

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तीन अलग-अलग ब्रांड की अवैध शराब बना रहे थे

छापेमारी में पता चला कि इस प्लांट में तीन अलग-अलग ब्रांड की अवैध शराब बनाई जा रही थी. इनमें 8 पीएम और आफ्टर डार्क ब्रांड की शराब शामिल हैं. उत्पाद विभाग का मानना है कि इसे उत्तर प्रदेश और दिल्ली का लेबल लगाकर बेचा जा रहा था. शराब की बोतल पर फॉर सेल ओनली उत्तर प्रदेश लिखा था. ज्ञात हो कि इस प्लांट में दो वर्ष पूर्व भी उत्पाद विभाग ने छापामारी की थी. इस दौरान इसे सील भी किया था. 

छापेमारी में जब्त सामग्री 

किंगफिशर स्ट्रॉन्ग प्रीमियम बीयर-  70 पेटी (प्रत्येक पेटी में 24 कैन थे).

आफ्टर डार्क ब्लू- 218 पेटी (प्रत्येक पेटी में 48 बोतलें थीं).

8 पीएम- 7 पेटी (प्रत्येक पेटी में 48 बोतलें थीं).

इन दोनों ब्रांडों की बोतलों पर फॉर सेल इन उत्तर प्रदेश लिखा हुआ था.

रॉयल्सन गोल्ड व्हिस्की- 78 पेटी. इन बोतलों पर फॉर सेल इन दिल्ली लिखा हुआ था. 

इन गड़बड़ियों का है आरोप

  • लाइसेंसधारी कंपनी ने विदेशी शराब का गलत स्टॉक रखा.
  • अवैध रूप से अन्य राज्यों में बिक्री की आशंका है.
  • उत्पाद विभाग द्वारा स्वीकृत ब्रांड से मिलते-जुलते अन्य ब्रांडों का भंडारण किया गया.
  • फर्जी कागजात बनाकर परिवहन और तस्करी की गई.
  • राज्य के राजस्व को क्षति पहुंचाई गई.

उत्पाद विभाग ने तैनात किया था बॉन्ड अफसर, फिर भी बन रही थी अवैध शराब

उत्पाद विभाग द्वारा प्लांट में बॉन्ड अफसर तैनात किया जाता है, जिसकी देखरेख में प्लांट में उत्पादन का कार्य होता है. ऐसे में विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि अधिकारी प्रतिनियुक्ति के बाद भी प्लांट में दूसरे ब्रांड के फर्जी लेबल लगाकर अवैध शराब कैसे बाहर बेची जा रही थी. सुबोध कुमार ने कहा कि बॉन्ड अफसर की निगरानी में ही प्लांट में सभी कार्य होते थे. जब वे दूसरे अंचल में व्यस्त रहते थे, तब शराब पर अलग-अलग टैग लगाकर उसे बिहार, यूपी और दिल्ली भेजा जाता था.

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