शराब से राजस्व का गणित : थोक बिक्री से सात साल में 8,412 करोड़ नुकसान

Updated at : 15 Jul 2020 1:42 AM (IST)
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शराब से राजस्व का गणित : थोक बिक्री से सात साल में 8,412 करोड़ नुकसान

शराब के कारोबार में सरकार को बड़ी चोट पहुंची है. झारखंड स्टेट बिवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के माध्यम से शराब की थोक बिक्री शुरू करने के बाद से बीते सात वर्षों में राज्य को 8,412.34 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है.

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विवेक चंद्र, रांची : शराब के कारोबार में सरकार को बड़ी चोट पहुंची है. झारखंड स्टेट बिवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के माध्यम से शराब की थोक बिक्री शुरू करने के बाद से बीते सात वर्षों में राज्य को 8,412.34 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है. उत्पाद विभाग ने सात वर्षों के दौरान शराब बिक्री की औसत वार्षिक वृद्धि दर के आधार पर यह अनुमान लगाया है. न्यूनतम वृद्धि दर के आधार पर भी नुकसान 2009.65 करोड़ होने का आकलन किया गया है. उत्पाद विभाग द्वारा विभागीय मंत्री को मौजूदा शराब नीति में बदलाव की आवश्यकता बताते हुए जेएसबीसीएल के कारण राजस्व व सेल बाइ वॉल्यूम में भी नुकसान होने की बात कही गयी है.

जेएसबीसीएल के कारण नहीं हुआ शराब की खपत में इजाफा : उत्पाद विभाग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जेएसबीसीएल के पास शराब का थोक व्यापार जाने के कारण बाजार आधारित सामान्य वृद्धि दर में कमी आयी है. इस दौरान शराब के अवैध व्यापार को भी प्रोत्साहन मिला है. हालांकि, पिछले वर्षों में एनआइसी के माध्यम से जेएसबीसीएल के स्टॉक की खरीद-बिक्री के लिए ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म विकसित करने का फायदा भी हुआ है.

लेकिन प्रक्रिया में पारदर्शिता की वजह से शराब की खपत में पर्याप्त इजाफा नहीं हुआ. 2009-10 से 2012-13 तक देशी शराब की औसत वार्षिक वृद्धि दर 23.5 प्रतिशत, विदेशी शराब की 18.3 प्रतिशत और बीयर की प्रतिवर्ष औसत वृद्धि दर 20.1 फीसदी थी. वहीं, जेएसबीसीएल के पास थोक व्यापार का जिम्मा आने के बाद वर्ष 2013-14 से 2016-17 तक वार्षिक वृद्धि दर नकारात्मक हो गयी.

औसत वार्षिक वृद्धि दर पर निकाला गया अनुमानित नुकसान : उत्पाद विभाग ने पिछले 11 वर्षों के सेल बाइ वॉल्यूम और उसकी वार्षिक वृद्धि के दर का विश्लेषण करते हुए उसके आधार पर नयी नीति तैयार करने का प्रस्ताव दिया है. तीन पैरामीटर पर शराब की बिक्री और राजस्व का विश्लेषण किया गया है. वित्तीय वर्ष 2009-10 से 2012-13 तक की औसत वार्षिक वृद्धि दर 18.3 प्रतिशत को औसत वृद्धि दर माना गया है.

विभाग द्वारा औसत वृद्धि दर के आधार पर वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2019-20 में 15,632 करोड़ रुपये राजस्व मिलने का अनुमान लगाया गया है. औसत वार्षिक वृद्धि दर के आधे में 10,726 करोड़ और न्यूनतम वार्षिक वृद्धि दर के आधार पर 9,229 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान बताया गया है.

जेएसबीसीएल से हुआ अनुमानित नुकसान

वर्ष प्राप्त उत्पाद औसत वार्षिक वृद्धि दर औसत वार्षिक वृद्धि दर के न्यूनतम वार्षिक वृद्धि दर

राजस्व पर अनुमानित राजस्व आधे पर अनुमानित राजस्व पर अनुमानित राजस्व

2013-14 643.70 747.95 701.32 683.41

2014-15 764.55 981.30 932.08 816.56

2015-16 915.68 1,399.36 1,158.99 1,077.44

2016-17 957.62 1,688.86 1,270.63 1,135.76

2017-18 847.24 2,304.53 1,577.22 1,359.66

2018-19 1,082.00 3,251.25 2,020.54 1,675.54

2019-20 2,009.00 5,258.88 3,065.41 2,481.07

कुल 7219.79 15,632.13 10,726.19 9229.44

जेएसबीसीएल के अस्तित्व में आने के बाद से राजस्व में बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है. आंकड़ों का विश्लेषण करने पर अनुमानित राजस्व काफी अधिक नजर आता है. अभी इसकी समीक्षा की जा रही है. पुख्ता तरीके से विचार करने के बाद ही राजस्व हित में कोई कदम उठाया जायेगा.

– विनय कुमार चौबे, सचिव, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग

Post by : Pritish Sahay

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