JSSC माध्यमिक आचार्य रिजल्ट पर उठे सवाल , 28% सफल निजी यूनिवर्सिटी से - 5 साल बाद PG करने वाले भी पास

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JSSC माध्यमिक आचार्य रिजल्ट पर उठे सवाल

राज्य में माध्यमिक आचार्य पद पर नियुक्ति के नतीजों पर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 28 फीसदी सफल अभ्यर्थी निजी विश्वविद्यालयों से हैं, और कई ऐसे भी हैं जिन्होंने स्नातक के 5 से 8 साल बाद पीजी की डिग्री हासिल की है।

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सुनील कुमार झा की रिपोर्ट

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रांची. राज्य में माध्यमिक आचार्य पद पर नियुक्ति के लिए हुई परीक्षा के परिणाम के बाद सफल अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. जेएसएससी द्वारा अनुशंसित अभ्यर्थियों में करीब 28 फीसदी निजी विश्वविद्यालयों से पीजी की डिग्री हासिल करने वाले हैं. कुल 377 सफल अभ्यर्थियों में से 244 अभ्यर्थी निजी विश्वविद्यालयों से पढ़े हैं. इनमें 108 अभ्यर्थी राज्य के दो निजी विश्वविद्यालयों से पीजी की डिग्री हासिल करने वाले हैं.

मामला केवल निजी विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं

मामला केवल निजी विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं है. सफल अभ्यर्थियों की शैक्षणिक समय-सीमा की पड़ताल में कई ऐसे मामले सामने आये हैं, जहां स्नातक की पढ़ाई पूरी करने और पीजी करने के बीच पांच से आठ वर्ष का अंतर है. इसके बाद इन अभ्यर्थियों ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में सफलता हासिल की.

स्नातक के कई साल बाद पीजी करने पर सवाल

माध्यमिक आचार्य पद पर नियुक्ति के लिए वर्ष 2025 में 23 विषयों में पहली बार स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया गया था. ऐसे में स्नातक के पांच से आठ वर्ष बाद पीजी की पढ़ाई करना और फिर नियुक्ति परीक्षा में सफल होना जांच का विषय बन गया है.

आठ वर्ष बाद पीजी की पढ़ाई

करीब 100 सफल अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के लगभग पांच से आठ वर्ष बाद पीजी की पढ़ाई की. ऐसे में यह जांच जरूरी मानी जा रही है कि इन वर्षों के दौरान पीजी में नामांकन कब लिया गया, नियमित पढ़ाई कब हुई, परीक्षा कब आयोजित हुई और डिग्री कब जारी की गयी.

समाजशास्त्र और राजनीति शास्त्र में सबसे अधिक सफल

निजी विश्वविद्यालयों से सफल अभ्यर्थियों की संख्या समाजशास्त्र और राजनीति शास्त्र विषय में सबसे अधिक है. समाजशास्त्र में 22 और राजनीति शास्त्र में 33 अभ्यर्थी निजी विश्वविद्यालयों से सफल हुए हैं. गृह विज्ञान में भी एक निजी विश्वविद्यालय से 14 अभ्यर्थियों के सफल होने की जानकारी सामने आयी है.

कई अभ्यर्थियों ने नियुक्ति के वर्ष में ही पूरी की पीजी

सफल अभ्यर्थियों में ऐसे लोगों की संख्या भी उल्लेखनीय है, जिन्होंने 2022-24 और 2023-25 सत्र में पीजी की पढ़ाई पूरी की है. माध्यमिक आचार्य नियुक्ति के लिए वर्ष 2025 में आवेदन आमंत्रित किया गया था. ऐसे में नियुक्ति परीक्षा से ठीक पहले या नियुक्ति वाले वर्ष में पीजी की डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थियों की शैक्षणिक समय-सीमा भी जांच का अहम बिंदु बन गयी है. सफल अभ्यर्थियों के प्राप्तांक भी जांच के दायरे में हैं. उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के अंक 65 से 68 फीसदी के आसपास हैं. इस तरह की एकरूपता को भी जांच का विषय माना जा रहा है.

खोरठा में एक ही निजी विवि से नौ अभ्यर्थी सफल

खोरठा विषय में सफल नौ अभ्यर्थियों का संबंध एक ही निजी विश्वविद्यालय से है. खास बात यह है कि इस विषय में शीर्ष सात सफल अभ्यर्थियों ने भी इसी निजी विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है. इस कारण इस विषय के परिणाम और संबंधित अभ्यर्थियों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

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इसलिए उठ रहे हैं सवाल

पहला: कई अभ्यर्थियों ने स्नातक के तुरंत बाद पीजी नहीं किया. स्नातक और पीजी के बीच पांच से आठ वर्ष का अंतर है.

दूसरा: वर्ष 2025 में 23 विषयों में पहली बार पीजी प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति का विज्ञापन जारी हुआ. नियुक्ति परीक्षा से कुछ समय पहले कई अभ्यर्थियों ने पीजी की डिग्री हासिल की.

तीसरा: निजी विश्वविद्यालयों से सफल कई अभ्यर्थियों के अंक 65 से 68 फीसदी के आसपास हैं. अंकों में इस तरह की समानता भी जांच का विषय है.

चौथा: खोरठा विषय में सफल नौ अभ्यर्थियों का एक ही निजी विश्वविद्यालय से होना और शीर्ष सात अभ्यर्थियों का उसी विश्वविद्यालय से पीजी करना भी सवाल खड़े करता है.

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इन बिंदुओं पर हो सकती है जांच

-अभ्यर्थी के नामांकन फॉर्म और नामांकन की तारीख

-पीजी में प्रवेश के लिए इस्तेमाल किये गये स्नातक प्रमाणपत्र

-हर सेमेस्टर/वर्ष की परीक्षा की तारीख

-परीक्षा में अभ्यर्थी की उपस्थिति का रिकॉर्ड

-आंतरिक मूल्यांकन और लिखित परीक्षा के प्राप्तांक

-अंकपत्र और रिजल्ट जारी होने की तारीख

-मूल रजिस्टर में दर्ज अंक और जारी अंकपत्र का मिला

-डिग्री/प्रोविजनल प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख

-संबंधित सत्र में विश्वविद्यालय की मान्यता और पाठ्यक्रम की स्थिति


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