JPSC-JSSC अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने रखीं 10 प्रमुख मांगें, पूरी नहीं हुई तो सीएम हेमंत को देना होगा इस्तीफा

रांची में प्रदर्शन करते छात्र. फोटो: प्रभात खबर
झारखंड में छात्र जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं. उन्होंने 10 सूत्री मांगपत्र सरकार को सौंपा है, जिसमें सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग शामिल है. अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज होगा और सीएम से इस्तीफे की भी मांग की गई है.
रांची से अभिषेक आनंद की रिपोर्ट
Jharkhand Students Protest: झारखंड में जेपीएससी (जेपीएससी) और जेएसएससी (जेएसएससी) परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों और छात्रों ने सरकार के सामने 10 सूत्री मांगपत्र रखा है. मांगपत्र में 14वीं जेपीएससी, वर्ष 2023 और 2025 के बैकलॉग विज्ञापनों को रद्द करने, सीबीआई और ईडी से जांच कराने, आयोग में व्यापक सुधार लागू करने और समयबद्ध नियुक्ति प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की गई है. अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर मुख्यमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना होगा.
14वीं जेपीएससी और बैकलॉग विज्ञापन रद्द करने की मांग
रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की है कि 14वीं जेपीएससी तथा वर्ष 2023 और 2025 के बैकलॉग विज्ञापनों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए. इसके साथ ही टीडीपीएल एजेंसी द्वारा पूर्व में आयोजित सभी परीक्षाओं को भी निरस्त करने की मांग उठाई गई है. उनका आरोप है कि इन परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. साथ ही 11वीं से 13वीं जेपीएससी मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन को भी नियमावली 2002 के विपरीत बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की गई है.
सीबीआई, ईडी जांच और 90 दिनों में सुनवाई की मांग
प्रदर्शनकारियों के मांगपत्र में कहा गया है कि सभी विवादित परीक्षाओं और संबंधित मामलों की जांच सीबीआई और ईडी से कराई जाए. छात्रों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है. टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी की कथित संलिप्तता की भी जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग रखी गई है.
जेपीएससी और जेएसएससी में बड़े सुधार की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आयोगों में व्यापक सुधार की मांग करते हुए कहा है कि जेपीएससी और जेएसएससी के शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला किया जाए. उनकी जगह निष्पक्ष और बेदाग छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति हो. साथ ही परीक्षा के प्रत्येक चरण के लिए अलग-अलग एजेंसियों का चयन जीईएम पोर्टल के माध्यम से किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर
मांगपत्र में कहा गया है कि मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की मैन्युअल जांच कर उसकी डिजिटल कॉपी अभ्यर्थियों के ओटीआर आईडी पर अपलोड की जाए. परिणाम जारी करते समय श्रेणीवार कटऑफ अंक सार्वजनिक किए जाएं तथा सात दिनों के भीतर प्रत्येक अभ्यर्थी का स्कोर कार्ड उपलब्ध कराया जाए. इसके अलावा ओएमआर शीट में "नॉट अटेम्प्ड" का विकल्प जोड़ने और सभी प्रश्नों पर बबल भरना अनिवार्य करने की भी मांग की गई है.
कैलेंडर, आयु सीमा और विज्ञापन को लेकर भी मांग
अभ्यर्थियों ने आयोग द्वारा रद्द की गई परीक्षाओं के साथ आगामी भर्तियों का वार्षिक कैलेंडर जारी करने तथा तय समय सीमा में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है. कैलेंडर का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठाई गई है. इसके अलावा 14वीं जेपीएससी की अधियाचना वापस लेकर 14वीं और 15वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का नया विज्ञापन जारी करने तथा अधिकतम आयु सीमा 1 अगस्त 2018 के आधार पर निर्धारित करने की मांग की गई है.
दौड़ की समय सीमा बढ़ाने और आयु में छूट की मांग
अभ्यर्थियों ने 1600 मीटर दौड़ की समय सीमा पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 6 मिनट से बढ़ाकर 7 मिनट करने की मांग की है. साथ ही सभी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में अनारक्षित वर्ग की अधिकतम आयु सीमा 42 वर्ष करने तथा अन्य वर्गों को नियमानुसार अतिरिक्त आयु छूट देने की मांग भी रखी गई है.
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मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
मांगपत्र के अंत में अभ्यर्थियों ने कहा है कि उनकी सभी मांगें न्यायसंगत और विद्यार्थियों के हित में हैं. यदि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा है कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में मुख्यमंत्री को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए.
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By कुमार विश्वत सेन
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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