रांची पहुंची देवेंद्र नाथ महतो की व्यवस्था सुधार यात्रा, छात्र बोले- कोर्ट की मुहर लगने तक आंदोलन रहेगा जारी

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रांची की बापू वाटिका में तीर-धनुष लिये छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो और अन्य छात्र.

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जेपीएससी, जेएसएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर निकली भर्ती सुधार यात्रा शुक्रवार को रांची पहुंची. छात्रों ने 24 जिलों का दौरा पूरा कर लिया है और कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार के फैसलों पर कोर्ट की मुहर नहीं लगती.

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रांची से राजलक्ष्मी की रिपोर्ट

Vyawastha Sudar Yatra: झारखंड में जेपीएससी, जेएसएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर निकली व्यवस्था सुधार यात्रा शुक्रवार को राजधानी रांची पहुंच गई. 24 अगस्त को नेमरा से शुरू हुई इस यात्रा ने राज्य के सभी 24 जिलों का दौरा पूरा किया. यात्रा में शामिल छात्रों ने साफ कहा कि यह यात्रा भले समाप्त हो रही है, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं होगा. उनका कहना है कि सरकार द्वारा परीक्षाएं रद्द करने के फैसले पर जब तक कोर्ट की मुहर नहीं लगती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.

24 जिलों की यात्रा पूरी कर राजधानी पहुंचे छात्र

यात्रा में शामिल छात्रों ने बताया कि उन्होंने पूरे झारखंड के 24 जिलों का भ्रमण किया और हर जिले में युवाओं, अभिभावकों और आम लोगों का समर्थन मिला. रांची पहुंचने के बाद बापू वाटिका से अलबर्ट एक्का चौक होते हुए बिरसा मुंडा समाधि स्थल तक रैली निकाली गई, जहां यात्रा का औपचारिक समापन हुआ. हालांकि आंदोलन को आगे भी जारी रखने का फैसला लिया गया है.


यह बस नहीं, हमारे लिए रथ है: छात्र

यात्रा में शामिल एक छात्र ने भावुक होकर कहा कि जिस बस से उन्होंने पूरे राज्य का दौरा किया, वह उनके लिए सिर्फ वाहन नहीं बल्कि "रथ" है. छात्रों ने बताया कि यात्रा के दौरान यह बस कई बार जंगलों और दुर्गम इलाकों में खराब हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. कई जगह ग्रामीणों ने भोजन कराया, रात में ठहरने की व्यवस्था की और बिना किसी स्वार्थ के सहयोग किया.

नंगे पैर चलने के पीछे बताया कारण

यात्रा में शामिल कई छात्र पूरे अभियान के दौरान नंगे पैर नजर आए. इस पर उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से चप्पल और जूते छोड़ने का फैसला किया है. उनका कहना था कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने यात्रा जारी रखी और अब उन्होंने संकल्प लिया है कि आंदोलन के दौरान चप्पल नहीं पहनेंगे.

छात्रा बोली- ट्रोलिंग झेली, लेकिन संघर्ष नहीं छोड़ा

यात्रा में शुरू से अंत तक शामिल रहने वाली तीन छात्राओं में से एक ने बताया कि सफर आसान नहीं था. बस में बैठने की तस्वीरों और वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया गया और कई तरह की टिप्पणियां की गईं. उन्होंने कहा कि इन सबके बावजूद उन्होंने आंदोलन नहीं छोड़ा, क्योंकि उनका उद्देश्य छात्रों के भविष्य के लिए लड़ना है.

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भर्ती व्यवस्था पर लगाए गंभीर आरोप

यात्रा के दौरान छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने दावा किया कि पूरे राज्य में युवाओं और अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता है. उनका कहना था कि वर्षों की मेहनत करने वाले छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और व्यवस्था में सुधार जरूरी है. साथ ही उन्होंने कहा कि आंदोलन का मकसद किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करना है.

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