झारखंड आवास बोर्ड का बड़ा फैसला! खत्म होगी 'फ्री होल्ड' व्यवस्था, अब फिर से 99 साल की लीज पर मिलेंगे मकान और प्लॉट

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झारखंड राज्य आवास बोर्ड का मुख्यालय

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झारखंड राज्य आवास बोर्ड ने जमीन और मकानों की फ्री होल्ड व्यवस्था को खत्म करने का बड़ा फैसला लिया है. अब बोर्ड लीज होल्ड व्यवस्था को फिर से अपनाने की तैयारी कर रहा है. इस बदलाव से जमीन और मकान के मालिकाना हक को लेकर नई परेशानियां खड़ी हो सकती हैं.

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रांची : झारखंड राज्य आवास बोर्ड ने ही होल्ड मामले में यू-टर्न ले लिया है. बोर्ड अब जमीन और मकान के फ्री होल्ड की व्यवस्था को खत्म कर लीज होल्ड की व्यवस्था अपनाने की तैयारी कर रहा है. बोर्ड ने पिछले करीब आठ माह से जमीन फ्री होल्ड करने पर अघोषित रोक भी लगा रखी है. इस व्यवस्था को खत्म करने से जमीन और मकान के मालिकाना हक को लेकर परेशानी बढ़ सकती है. इस सिलसिले में आवास बोर्ड ने प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा है. आवास बोर्ड का तर्क है कि जमीन फ्री होल्ड करना उसके हित में नहीं है. इससे बोर्ड की संपत्तियों पर न केवल नियम विरुद्ध निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि कई मामलों में जमीन की प्रकृति में बदलाव किये जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं. इधर बोर्ड ने पिछले करीब आठ माह से जमीन फ्री होल्ड करने पर अघोषित रोक लगा रखी है.

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रघुवर सरकार की फ्री होल्ड नीति और काबिज लोगों का पेंच

वर्ष 2019 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने आवास बोर्ड की जमीन और मकानों को फ्री होल्ड करने की व्यवस्था लागू की थी. इसका उद्देश्य लीजधारकों को संपत्ति का मालिकाना हक देना था, ताकि वह अपने नाम रजिस्ट्री करा सकें और संपत्ति का हस्तांतरण कर सकें. मकानों और भूखंडों पर है कब्जा। शहरी क्षेत्रों में आवास बोर्ड के कई मकानों और खाली भूखंडों पर लोगों का अवैध कब्जा है. बोर्ड ने लंबे समय से कब्जे में रहनेवालों को भी संपत्ति अपने नाम कराने का विकल्प दिया है. 10 साल से कब्जेवाले लोगों को निर्धारित दर पर मकान अपने नाम कराने की सुविधा दी गयी, लेकिन दर इतनी अधिक है कि बड़ी संख्या में लोग राशि देने की स्थिति में नहीं है, नतीजा यह है कि कब्जे वाले मकान और जमीन की भी रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है. आवास बोर्ड के कई मकानों में ऐसे लोग भी रह रहे हैं, जिन्होंने मकान तो आवंटित करा लिया, लेकिन उसके बाद बोर्ड को नियमित भुगतान नहीं किया. बकाया राशि पर चक्रवृद्धि ब्याज जुड़ते-जुड़ते देनदारी काफी बढ़ गयी है. अब ऐसे आवंटी बकाया चुकाने की स्थिति में नहीं है. इस कारण उन्होंने बोर्ड से एनओसी तक नहीं ली.

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बिहार की तर्ज पर लागू हुई थी फ्री होल्ड व्यवस्था

झारखंड में फ्री होल्ड व्यवस्था बिहार की तर्ज पर लागू हुई थी. बिहार में वर्ष 2015 से यह व्यवस्था लागू है. झारखंड में भी इसका उद्देश्य आवास बोर्ड की पुरानी लीज संपतियों को स्थायी मालिकाना हक में बदलना था. लेकिन अपेक्षित संख्या में लोग फ्री होल्ड के लिए आगे नहीं आये. अब आवास बोर्ड का प्रस्ताव सरकार के स्तर पर विचाराधीन है. भूमि फ्री होल्ड करने का निर्णय आवास बोर्ड के अनुकूल नहीं है. फ्री होल्ड कराने के बाद लोग जमीन की प्रकृति के विपरीत उसका व्यावसायिक प्रयोग कर रहे हैं. बोर्ड के नियमों के उलट उस पर निर्माण कार्य करा रहे है. इस संबंध में विभाग को सूचित किया गया है. हालांकि, फ्री होल्ड का निर्णय बदलने के बाद भी उन लोगों को कोई परेशानी नहीं होगी, जिनको भूमि की होल्ड करने की अनुमति दी जा चुकी है.

सूरज कुमार, एम डी झारखंड राज्य आवास बोर्ड

ऐसे जानिये क्या है व्यवस्था

फ्री होल्ड

इसमें बोर्ड की जमीन या फ्लैट का मालिकाना हक लीजधारक को मिल जाता है. इसके बाद संपत्ति के हस्तांतरण के लिए बोर्ड की अनुमति की जरूरत नहीं होती, नक्शा पास कराने के लिए भी बोर्ड की स्वीकृति की अनिवार्यता समाप्त होनी थी

लीज होल्ड

इसमें बोर्ड संपत्ति का मूल मालिक रहता है और लीजधारक को सामान्य तौर पर 99 साल के लिए उपयोग का अधिकार मिलता है. संपति के हस्तांतरण पर बोर्ड की अनुमति और निर्धारित राशि का भगतान करना पड़ता है.

नयी व्यवस्था से क्या होगा

मालिकाना हक पर संकट खान होनी बिना अनुमति जमीन बेधने और बैंक लोन की सुविधा अवैध कब्जे का पेंच भारी भरकम स्याज और सर्किल रेट की दरों से अटकी रजिस्ट्री

फ्री होल्ड के लिए बाजार दर का 10% शुल्क

फ्री होल्ड कराने के लिए आवास बोर्ड की और से लीजधारकों से बाजार दर की 10% राशि परिवर्तन प्रभार के रूप में लेने का प्रावधान किया गया था. की होल्ड होने के बाद संपति को अपनी मिलकियत के रूप में दिखाने, आसानी से बेचने और बैंक से ऋण लेने की सुविधा मिलनी थी. लेकिन लीज होल्ड संपत्ति पर ऋण लेने में लोगों को परेशानी होती है.

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