अब फाइलों में नहीं अटकेंगे कर्मचारियों के पेंशन रिकॉर्ड, डिजिटाइजेशन के लिए झारखंड सरकार ने खोला खजाना
पेंशन रिकॉर्ड को लैपटॉप के जरिए अपलोड करते कर्मचारी. एआई जेनरेटेड फोटो.
झारखंड सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के पेंशन और सेवा रिकॉर्ड को डिजिटाइज करने की प्रक्रिया को गति दी है। 46.85 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की गई है, जिससे मैनुअल रिकॉर्ड से ऑनलाइन व्यवस्था में बदलाव आएगा।
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Pension Record Digitisation: झारखंड सरकार ने सेवानिवृत्त और सेवारत सरकारी कर्मचारियों के पेंशन एवं सेवा रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए 46.85 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है. वित्त विभाग के पेंशन एवं लेखा निदेशालय की ओर से जारी संकल्प के अनुसार, रांची स्थित प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) कार्यालय में चल रही डिजिटलीकरण परियोजना के तीसरे चरण के लिए 46,85,584 रुपये स्वीकृत किये गये हैं. यह राशि परियोजना के तीसरे चरण के कार्यों पर खर्च होगी.
मैनुअल रिकॉर्ड से ऑनलाइन व्यवस्था की ओर
प्रधान महालेखाकार कार्यालय की ओर से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन भुगतान आदेश जारी करने के साथ प्रथम वर्ग के राजपत्रित अधिकारियों, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से संबंधित वेतन पूर्जा जारी किया जाता है. इन सेवाओं से जुड़े व्यक्तिगत रिकॉर्ड फिलहाल मैनुअल प्रणाली से रखे जाते हैं. पुराने रिकॉर्ड तलाशने और निर्धारित समय में मामलों का निष्पादन करने में इस व्यवस्था के कारण समय लगता है. डिजिटलीकरण के बाद रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होने से मामलों के त्वरित निष्पादन और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी में तेजी आने की उम्मीद है.
तीसरे चरण में ये काम होंगे
स्वीकृत राशि से परियोजना के तीसरे चरण में कई महत्वपूर्ण कार्य किये जायेंगे. इनमें समाधान वेब आधारित शिकायत निवारण पोर्टल का रख-रखाव और सुदृढ़ीकरण, इलेक्ट्रॉनिक डाक प्रणाली का रोल-आउट और पीएसएआइ के तहत अतिरिक्त कार्य शामिल हैं. इसके अलावा डेटा विश्लेषण और वाउचरों की तकनीकी जांच को उन्नत किया जायेगा. पेंशन और सामान्य स्थापना से जुड़े शेष पुराने रिकॉर्डों के डिजिटलीकरण का काम भी इस चरण में पूरा करने का लक्ष्य है.
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2019 से जारी है वित्तीय सहयोग
पेंशन एवं सेवा रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की परियोजना की शुरुआत तत्कालीन मुख्यमंत्री और प्रधान महालेखाकार के बीच 20 नवंबर 2018 को हुई बैठक के बाद हुई थी. इसके बाद सरकार की ओर से तीन चरणों में वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी गयी है. प्रथम चरण के तहत 54.33 लाख रुपये, द्वितीय चरण में 50.037 लाख रुपये व तृतीय चरण में 46.85 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गयी है.
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