महिला बाल विकास व सामाजिक सुरक्षा विभाग की अनुदान मांग पारित, सरकार देगी पोषण सखियों का वेतन

मंत्री जोबा मांझी ने कहा कि पूर्व की सरकार में भारत सरकार ने राज्य के छह जिलों में पोषण सखी रखने की सहमति दी थी. लेकिन केंद्र सरकार ने वेतन देना बंद कर दिया है, लेकिन राज्य सरकार अपने प्रयास से इस माह के अंत तक उनलोगों के वेतन का भुगतान कर देगी
रांची: महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की मंत्री जोबा मांझी ने कहा कि पूर्व की सरकार में भारत सरकार ने राज्य के छह जिलों में पोषण सखी रखने की सहमति दी थी. करीब 10388 पोषण सखी काम कर रही हैं. अब इनको पैसा देना भी केंद्र सरकार ने बंद कर दिया है. इस कारण इनको भुगतान नहीं हो रहा है.
राज्य सरकार अपने प्रयास से इस माह के अंत तक उनका पूरा बकाया दे देगी. श्रीमती मांझी शुक्रवार को विधानसभा में बजट सत्र के दौरान महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की अनुदान मांग पर लाये गये कटौती प्रस्ताव के बाद सरकार का उत्तर दे रही थीं. चर्चा में हिस्सा लेने के बाद विपक्ष ने बहिष्कार कर दिया. इसके बाद विभाग का 57 अरब 42 करोड़ 31 लाख 55 हजार रुपये की अनुदान मांग ध्वनिमत से पारित हो गयी.
श्रीमती मांझी ने कहा कि महिला आयोग के रिक्त पदों को जल्द भरा जायेगा. सरकार सेविका और सहायिका का मानदेय बढ़ने पर भी विचार कर रही है. आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति लेने में दिक्कत हो रही है. इसे दूर किया जायेगा. राज्य में कल्याण आयुक्त का रिक्त पद भी जल्द भरा जायेगा.
कभी-कभी केंद्र से समय पर पैसा नहीं मिलने के कारण यूनिवर्सिल पेंशन स्कीम के लाभुकों को पैसा देने में दिक्कत रहती है. इसे दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. आंगनबाड़ी केंद्रों में अंडा बांटने के लिए सरकार ने 890 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. 2022-23 में करीब 33 करोड़ रुपये की लागत से कंबल बांटा जायेगा.
चर्चा के दौरान जगन्नाथपुर मंदिर के पास एक सरना स्थल के विकास में एचइसी द्वारा आपत्ति जताये जाने का मामला विधायक राजेश कच्छप ने उठाया. मंत्री श्रीमती मांझी ने कहा कि जमीन लेने से पहले सोचना चाहिए था. इस पर सरकार विचार करेगी.
कटौती प्रस्ताव का विरोध करते हुए दीपक बिरुआ ने कहा कि सार्वजनिक पेंशन योजना अच्छी है. झारखंड में आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका का मानदेय बढ़ना चाहिए. आंध्र में इनको 2.5 लाख का रिटायर बेनीफिट और केरल में 800 रुपये पेंशन मिलता है. इसे यहां भी लागू किया जाना चाहिए.
पूर्णिमा नीरज सिंह ने कहा कि लिंग का भेदभाव आज भी है. सरकार को नीति निर्धारण में महिलाओं को भी शामिल करना चाहिए. महिलाओं को कानूनी सहायता का प्रावधान होना चाहिए. महिलाओं से संबंधित कई शब्दों का प्रयोग आज भी होता है. इसे रोका जाना चाहिए. बंधु तिर्की ने कहा कि दो सप्ताह से कल्याण आयुक्त और टीसीडीसी का पद रिक्त है.
इससे मार्च माह में पैसा लैप्स होने का खतरा है. कल्याण विभाग की कई योजनाएं अच्छी है, लेकिन इसे जमीन पर उतारा जाना चाहिए. राजधानी के एक मौजा के 37 गांव का रजिस्टर-2 में छेड़छाड़ किया गया है. पिछली सरकार ने कई जनजातीय स्कूल आरएसएस समर्थित लोगों को संचालन के लिए दे दिया है. इसकी जांच होनी चाहिए.
सरयू राय ने कहा कि नेशनल हेल्थ सर्वे में झारखंड की स्थिति अच्छी नहीं है. यहां 15 से 49 साल की करीब 65.49 फीसदी महिलाओं में रक्त अल्पतता है. 67 से 70 फीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार है. करीब 47 फीसदी बच्चे का वजन उम्र के हिसाब से नहीं है. इसकी समीक्षा सरकार को करनी चाहिए.
आंगनबाड़ी में कोविड के समय पूरक आहार की अापूर्ति नहीं हुई है. इनको टेक होम राशन भी नहीं मिला है. इसके लिए मुआवजा का प्रावधान है. कितने लोगों मुआवजा मिला, इसकी जांच होनी चाहिए. सरकार एक बार फिर डिब्बा बंद खाना आंगनबाड़ी में देना चाह रही है. इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल होते रहे हैं. पहले रेडी टू इट के मामलों को ध्यान में रखना चाहिए. चर्चा में सबिता महतो ने भी हिस्सा लिया.
इससे पूर्व कटौती प्रस्ताव पेश करते हुए डॉ नीरा यादव ने कहा कि सरकार महिला के सुरक्षा की बात करती है, जबकि दो साल से महिला आयोग रिक्त है. बाल संरक्षण आयोग की भी यही स्थिति है. केदार हाजरा ने कहा कि सरकार को एक दिन जनजातीय मामलों पर सदन में विशेष चर्चा करानी चाहिए. जनजातीय विकास का बात करने वाली सरकार ने बजट में इस विभाग के लिए मात्र आठ फीसदी का प्रावधान किया है.
Posted By: Sameer Oraon
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By Prabhat Khabar News Desk
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