हाईकोर्ट का फैसला: 30 जून को रिटायर कर्मियों को मिलेगा नोशनल वेतनवृद्धि का लाभ

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झारखंड हाईकोर्ट ने 30 जून को रिटायर हुए कर्मियों को नोशनल वेतनवृद्धि का लाभ देने का निर्देश दिया है. पेंशनरों को आठ सप्ताह में एरियर मिलेगा.

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रांचीः झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के हित में अहम फैसला सुनाया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने स्पष्ट किया है कि 30 जून को सेवानिवृत्त होनेवाले कर्मचारियों को एक काल्पनिक (नोशनल) वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ मिलेगा. यह लाभ उन कर्मचारियों को भी मिलेगा, जो 11 अप्रैल 2023 से पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं.

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अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि नोशनल वेतनवृद्धि का लाभ एक जनवरी 2006 से प्रभावी माना जाये. इसके आधार पर संबंधित सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन का पुनर्निर्धारण कर संशोधित पेंशन और एरियर की राशि आठ सप्ताह के भीतर भुगतान की जाये. अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार की दलील को स्वीकार नहीं किया.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सिर्फ भविष्य तक सीमित नहीं माना

हाइकोर्ट ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट किसी फैसले को स्पष्ट रूप से भविष्य के लिए लागू घोषित नहीं करता, तब तक उसका प्रभाव पूर्वव्यापी माना जाता है. अदालत ने कहा कि 11 अप्रैल 2023 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला कोई नया कानून नहीं बनाता, बल्कि पहले से मौजूद कानूनी स्थिति को स्पष्ट करता है. इसलिए इसका लाभ उन कर्मचारियों को भी मिलना चाहिए, जो फैसले की तारीख से पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं.

अदालत ने माना कि छठे वेतन आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2006 से लागू हैं और नोशनल वेतनवृद्धि का अधिकार भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है. ऐसे में 11 अप्रैल 2023 को लाभ की प्रभावी तिथि मानने का कोई तार्किक आधार नहीं है. हाइकोर्ट के इस फैसले से 30 जून को सेवानिवृत्त हुए बड़ी संख्या में झारखंड के पेंशनरों को संशोधित पेंशन और बकाया राशि मिलने का रास्ता साफ हो गया है.

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क्या है मामला

पथ निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी विजय कुमार श्रीवास्तव, सत्यदेव प्रसाद, मधुकर कुमार सिन्हा और विनोद कुमार श्रीवास्तव की ओर से दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गयी थीं. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने अपने सेवानिवृत्ति वर्ष में 30 जून तक एक वर्ष की सेवा पूरी कर ली थी. इसलिए वे एक जुलाई को मिलनेवाली वार्षिक वेतनवृद्धि के हकदार हैं. इसी आधार पर उन्होंने पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के पुनरीक्षण की मांग की थी. उनका दावा सुप्रीम कोर्ट के 11 अप्रैल 2023 के फैसले पर आधारित था. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे कर्मचारियों को नोशनल वेतनवृद्धि देने का सिद्धांत स्वीकार किया था.

राज्य सरकार ने नये मामलों तक सीमित किया था लाभ

राज्य सरकार ने 16 मार्च 2024 को अधिसूचना जारी कर नोशनल वेतनवृद्धि देने का प्रावधान स्वीकार किया था. हालांकि, इसका लाभ केवल उन कर्मचारियों तक सीमित रखा गया, जो 11 अप्रैल 2023 के बाद 30 जून या 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हुए थे. सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य के मामलों पर लागू होगा. इसलिए 11 अप्रैल 2023 से पहले सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं दिया जा सकता. हाइकोर्ट ने सरकार की इस दलील को खारिज करते हुए पुराने मामलों में भी नोशनल वेतनवृद्धि का लाभ देने का निर्देश दिया है.

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