गुरुद्वारा साहिब में मनाया गया श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व
रांची के कृष्णा नगर कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा में श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया.
रांची. गुरुद्वारा श्री गुरुनानक सत्संग सभा की ओर से कृष्णा नगर कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा साहिब में शनिवार को धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व मनाया गया. इस उपलक्ष्य में विशेष दीवान सजाया गया. इसकी शुरुआत सुबह आठ बजे हजूरी रागी जत्था भाई महिपाल सिंह द्वारा आसा दी वार कीर्तन से हुई. इसके बाद उन्होंने सुबह 8:40 से 9:15 बजे तक ‘गुर राम दास राखो शरनाई..., संता के कारज आप खलोया हर कम्म करावन आया राम..., सो सतगुर प्यारा मेरे नाल है... और हम बैठे तुम देहो असीसां... समेत अन्य शबद कीर्तन कर साध संगत को निहाल किया. गुरु घर के सेवक मनीष मिड्ढा ने गुरु ग्रंथ साहिब के पहले प्रकाश पर्व पर बताया कि गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु राम दास जी की वाणी श्री पोथी साहिब में लिखी जाती थी और वह पोथी गोइंदवाल साहिब (गुरु अर्जुन देव जी का ननिहाल) के बाबा मोहन सिंह के पास थी. गुरु अर्जुन देव जी इस पोथी साहिब को अमृतसर ले आये और चंवर से इसकी सेवा करते रहे. वर्ष 1602 में गुरु अर्जुन देव जी ने रामसर साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की रचना शुरू की. इसमें गुरु अर्जुन देव जी बोलते थे और भाई गुरदास जी लिखते थे.
वर्ष 1604 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व
वर्ष 1604 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व हुआ और पहला प्रकाश बाबा बुड्ढा जी ने किया. उस समय श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में 974 अंग (पृष्ठ) थे और इसमें पांच गुरुओं की वाणी थी. श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला हुक्मनामा था संता के कारज आप खलोंया हर कम करावन आया राम... श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने दमदमा साहिब में अन्य पांच गुरुओं की वाणी को संकलित कर इसका संपादन किया. इस क्रम में उन्होंने वाणी का उच्चारण किया और भाई मनी सिंह ने उन वाणियों को लिखा. अंततः कुल 1430 अंग (पृष्ठ) का श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का स्वरूप तैयार हुआ. इसके संपादन में नौ महीने, नौ दिन और नौ घड़ियां लगीं.
गुरु घर का सरोपा देकर किया सम्मानित
सत्संग सभा के प्रधान अर्जुन देव मिढ़ा व सचिव सुरेश मिढ़ा ने श्री पालकी साहिब की निःशुल्क सजावट के लिए विनोद मालाकार को गुरु घर का सरोपा देकर सम्मानित किया. संचालन मनीष मिढ़ा ने किया. श्री आनंद साहिब जी के पाठ, अरदास, हुकुमनामा व कढ़ाह प्रसाद वितरण के साथ दीवान की समाप्ति सुबह 9:30 बजे हुई. गुरुनानक सत्संग सभा की ओर से श्रद्धालुओं के बीच मिष्ठान प्रसाद का वितरण किया गया.
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