चारा घोटाला: लालू प्रसाद समेत 50 से अधिक अपीलों पर 6 महीने में सुनवाई होगी पूरी, सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश
लालू प्रसाद यादव, सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट.
चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव की 50 से अधिक लंबित आपराधिक अपीलों की सुनवाई अब तेज होगी. झारखंड हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, पक्षकारों को ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड का निरीक्षण कर जरूरी दस्तावेज चिन्हित करने का निर्देश दिया है.
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Lalu Prasad Fodder Scam: चारा घोटाला मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव समेत 50 से अधिक लंबित आपराधिक अपीलों की सुनवाई अब तेजी से आगे बढ़ेगी. झारखंड हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सुनवाई की प्रक्रिया तेज करते हुए पक्षकारों को ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड का निरीक्षण कर जरूरी दस्तावेज चिन्हित करने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने 21 अगस्त 2026 को पारित किया. यह मामला लालू प्रसाद यादव की क्रिमिनल अपील (एसजे) संख्या 795/2013 समेत वर्ष 2013 और 2019 की कुल 50 से अधिक अपीलों से जुड़ा है, जिनमें चारा घोटाले के विभिन्न मामलों के दोषी अपीलकर्ता शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने में निपटारे का दिया निर्देश
हाईकोर्ट के समक्ष सुप्रीम कोर्ट के स्पेशल लीव टू अपील (क्रिमिनल) संख्या 1550/2020 में 14 जुलाई 2026 को पारित आदेश रखा गया. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि इन सभी अपीलों की सुनवाई में तेजी लाई जाए और जहां तक संभव हो, छह महीने के भीतर इनका निपटारा किया जाए. इसी निर्देश के अनुपालन में हाईकोर्ट ने आगे की कार्यवाही के लिए आवश्यक कदम उठाने का फैसला किया.
पेपर बुक तैयार होने के बाद ही होगी प्रभावी बहस
सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं के अधिवक्ताओं और सीबीआई की ओर से पेश वकीलों ने संयुक्त रूप से अदालत को बताया कि मामले में प्रभावी बहस शुरू करने से पहले पेपर बुक तैयार होना आवश्यक है. अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड अत्यंत विशाल और भारी-भरकम है. इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों की हार्ड कॉपी सभी पक्षों को उपलब्ध कराना व्यावहारिक नहीं है.
जरूरी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी मिलेगी
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है. निरीक्षण के दौरान उन्हें यह तय करना होगा कि बहस के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी. इसके बाद अदालत उन चयनित दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपीलकर्ताओं और सीबीआई दोनों पक्षों को उपलब्ध कराने पर आदेश पारित करेगी. इससे रिकॉर्ड की तैयारी में समय कम लगेगा और सुनवाई निर्धारित समयसीमा में आगे बढ़ सकेगी.
आठ सप्ताह में निरीक्षण पूरा करने का निर्देश
अदालत ने अपीलकर्ताओं और सीबीआई के वकीलों को प्राथमिकता के आधार पर आठ सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड का निरीक्षण पूरा करने को कहा है. निरीक्षण और दस्तावेजों की पहचान पूरी होने के बाद दोनों पक्ष अदालत के समक्ष मामले का उल्लेख कर आगे की सुनवाई शुरू कराने के लिए स्वतंत्र होंगे.
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मृत अपीलकर्ताओं की स्थिति स्पष्ट करने को कहा
हाईकोर्ट ने अपीलकर्ताओं के अधिवक्ताओं को एक अतिरिक्त निर्देश भी दिया है. अदालत ने कहा है कि वे यह स्पष्ट करें कि जिन अपीलकर्ताओं की मृत्यु हो चुकी है, उनकी अपीलें पहले से विधिक रूप से समाप्त (एबेट) हुई हैं या नहीं. यह जानकारी सभी लंबित अपीलों की अद्यतन स्थिति स्पष्ट करने और आगे की सुनवाई को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने के लिए मांगी गई है. अदालत के इस आदेश के बाद अब चारा घोटाले से जुड़े वर्षों पुराने मामलों के अंतिम निपटारे की प्रक्रिया पहले की तुलना में तेज होने की उम्मीद बढ़ गई है.
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