फ्लिपकार्ट कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, आपराधिक मामला और संज्ञान आदेश रद्द
झारखंड हाईकोर्ट ने फ्लिपकार्ट के दो कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला और निचली अदालत के संज्ञान आदेश को रद्द कर दिया है. जानें क्या है पूरा मामला.
रांची. झारखंड हाईकोर्ट ने फ्लिपकार्ट के दो कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला और निचली अदालत के संज्ञान आदेश को रद्द कर दिया है. जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने कहा कि कर्मचारियों के खिलाफ न तो संपत्ति के सुपुर्द किये जाने का आरोप है और न ही धोखाधड़ी कर संपत्ति देने के लिए प्रेरित करने का. ऐसे में भारतीय दंड संहिता की धारा 406 और 420 के तहत अपराध नहीं बनता.
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मामला रांची के डोरंडा थाना कांड संख्या 408/2019 से जुड़ा है. लालजीत प्रसाद सिन्हा की कंपनी फ्लिपकार्ट पोर्टल पर सामान बेचती थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके 19 शिपमेंट, जिनकी कीमत 1,06,720 रुपये थी, ई-कार्ट लॉजिस्टिक्स ने वापस नहीं किये. इससे उन्हें कुल 1,63,369 रुपये का नुकसान हुआ.मामले में ई-कार्ट लॉजिस्टिक्स के हरमू हब प्रभारी मनीष कुमार और फ्लिपकार्ट की सुरक्षा टीम के मैनेजर चंदन कुमार को आरोपी बनाया गया था.
पुलिस ने जांच के बाद दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता की कंपनी और फ्लिपकार्ट के बीच हुए व्यावसायिक समझौते में दोनों कर्मचारियों की व्यक्तिगत भूमिका नहीं थी. सामान की सुपुर्दगी कंपनी को हुई थी, दोनों कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से नहीं.
अदालत ने यह भी पाया कि कर्मचारियों ने कोई झूठा या भ्रामक बयान देकर शिकायतकर्ता को सामान देने के लिए प्रेरित नहीं किया था. इसलिए धारा 420 के तहत अपराध नहीं बनता. अदालत ने कहा कि इन परिस्थितियों में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. इसके बाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर 2020 के निचली अदालत के संज्ञान आदेश समेत दोनों कर्मचारियों के खिलाफ पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी.
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