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झारखंड में मॉडल स्कूलों का हाल- शिक्षकों की कमी, दाखिला भी कम, किताबें भी नहीं मिल रहीं

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
मॉडल स्कूलों का हाल
मॉडल स्कूलों का हाल
प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची : केंद्रीय विद्यालय की तर्ज पर शुरू किये गये झारखंड के मॉडल स्कूल खस्ताहाल हैं. शिक्षकों की भारी कमी है, तय सीटों के मुकाबले कम विद्यार्थियों का दाखिला हो रहा, बच्चों को समय पर किताबें नहीं मिल रहीं हैं. झारखंड में 89 मॉडल स्कूल चल रहे हैं, जिनमें 8000 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है. हर स्कूल में शिक्षक व कर्मी समेत कुल 19 पद सृजित हैं. जबकि, सभी स्कूलों को मिला कर मात्र 138 घंटी आधारित शिक्षक ही नियुक्त हैं.

इधर, शिक्षकों की कमी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों में सरकारी शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति का निर्देश दिया था, लेकिन कुछ जिलों में सरकारी शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति भी समाप्त कर दी गयी है. कई स्कूलों में तो मात्र एक या दो शिक्षक हैं. इन शिक्षकों को एक घंटी के लिए 120 रुपये दिये जाते हैं. नियुक्ति के बाद से इनका मानदेय भी नहीं बढ़ा है.

  • 89 मॉडल स्कूल चल रहे हैं राज्यभर में

  • 8000 विद्यार्थियों का नामांकन हैं अभी

  • 138 घंटी आधारित शिक्षक नियुक्त हैं इनमें

मॉडल स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से छठी से लेकर 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है. इनमें नामांकन के लिए झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) द्वारा प्रवेश परीक्षा ली जाती है. शुरुआत में केंद्र प्रायोजित योजना के तहत मॉडल स्कूल संचालित होते थे. केंद्र सरकार ने देश भर में शैक्षणिक रूप से पिछड़े प्रखंड में केंद्रीय विद्यालय की तर्ज पर मॉडल स्कूल खोलने की योजना शुरू की थी.

प्रथम चरण में वर्ष 2011 में 40 तथा 2013 में 49 मॉडल स्कूल खोले गये. वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने 75 मॉडल स्कूल की स्वीकृति दी थी. वर्ष 2015 में केंद्र सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया. वर्ष 2014 में स्वीकृत विद्यालय भी नहीं खुल सके.

वर्ष 2016 में सृजित हुए पद, पर नहीं हुई नियुक्ति : मॉडल स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए वर्ष 2016 में पद सृजन की प्रक्रिया पूरी हुई. इसके अनुसार, एक मॉडल स्कूल में शिक्षक व कर्मियों के कुल 19 पद सृजित हैं. पद सृजन के बाद नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू की गयी थी, जिसे बाद में रोक दिया गया. रांची जिले में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त किये जाने के बाद मॉडल स्कूलों में कक्षाएं एक या दो शिक्षक के भरोसे चल रही हैं.

3560 में से 1948 सीटें रह गयीं रिक्त : मॉडल स्कूल में प्रति वर्ष सीटें खाली रह जाती हैं. वर्ष 2020 की प्रवेश परीक्षा में 4001 विद्यार्थी में शामिल हुए थे. नामांकन के लिए 1612 विद्यार्थियों का चयन किया गया. मॉडल स्कूल में कुल 3560 सीटें हैं, जिनमें से 1948 सीटें रिक्त रह गयीं. वर्ष 2015 में 86, वर्ष 2016 में 80, वर्ष 2018 में 67 व वर्ष 2019 में 70 मॉडल स्कूलों में सीटें रिक्त रह गयी थीं.

वर्ष 2020-21 के बच्चों को नहीं मिली किताबें : मॉडल स्कूल के छठी से आठवीं तक के बच्चों को नि:शुल्क किताबें देने का प्रावधान है. बच्चों को राज्य सरकार के पाठ्यक्रम के अनुरूप अंग्रेजी माध्यम में किताबें उपलब्ध करायी जानी हैं, लेकिन पाठ्यक्रम का अंग्रेजी में अनुवाद नहीं हो पाया है.

इस कारण पिछले वर्ष बच्चों को एनसीइआरटी की किताबें ही दी गयी थीं. वहीं, वर्ष 2020-21 के लिए बच्चों को किताबें अब तक नहीं मिली. इससे पूर्व वर्ष 2016-17 में भी बच्चों को किताब नहीं मिली थीं.

51 विद्यालयों का बन गया है भवन : 89 मॉडल स्कूल में से 51 का भवन तैयार हो गया है. पांच स्कूलों के भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है. जबकि 33 स्कूलों के भवन का निर्माण का कार्य चल रहा है.

Posted by: Pritish Sahay

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