झारखंड से कोयला ढुलाई पर संकट: जेम पोर्टल पर भुगतान रुका, चालान नहीं कटने से पावर प्लांटों को थम सकती है सप्लाई

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कोयला ढुलाई की प्रतीकात्मक फोटो

झारखंड से कोयला आपूर्ति पर गंभीर संकट मंडरा रहा है. जेम पोर्टल पर भुगतान रुकने के कारण कोयला कंपनियों के लिए चालान जारी नहीं हो पा रहे हैं. इससे रोज करीब ढाई लाख टन कोयले की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर देश भर के पावर प्लांट्स पर पड़ेगा.

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मनोज सिंह, रांची

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राज्य सरकार के जेम पोर्टल पर कोयला कंपनियां द्वारा अग्रिम राशि का भुगतान करने की प्रक्रिया रुक गयी है. इससे झारखंड से रोज करीब ढाई लाख टन होनेवाली कोयला आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. कोयला कंपनियां संशोधित खनिज विधेयक लागू होने के बाद से चालान नहीं निकाल पा रही हैं. इस चालान के माध्यम से ही दूसरे राज्यों में कोयला पहुंचाया जाता है.

झारखंड से रोज 70 रैक कोयला सप्लाई

झारखंड में तीन कोयला कंपनियां है. यहां से देश के अलग-अलग कोने के पावर प्लांटों में कोयला जाता है. CCL से रोज करीब 45 रैक कोयला जाता है. BCCL से 25 तथा इसीएल वाले हिस्से से करीब चार से पांच रैक कोयला हर दिन देश के करीब-करीब हर राज्य में जाता है. इसके रुकने से इसका सीधा असर देश के विजलीघरों के कोयला स्टॉक पर पड़ सकता है. फिलहाल नया विधेयक लागू होने पर कोयला कंपनियों का टैक्स और अन्य मद में एडवांस जमा होना बंद हो गया है. तय प्रावधान के अनुसार BCCL, CCLऔर ECL राज्य सरकार के पास 10 से 15 दिनों का एडवांस पैसा जमा करती है. लेकिन अब कई कंपनियों की एडवांस राशि इसी सप्ताह समाप्त हो जायेगी.

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भुगतान अटका तो चालान भी रुका

कोयला कंपनियों द्वारा जेम पोर्टल से एडवांस राशि जमा करने पर ही कोयला ढुलाई के लिए चालान जारी होता था. इसी के सहारे कोयले की आपूर्ति होती थी. लेकिन अब भुगतान रुक जाने से चालान नहीं निकल पा रहे हैं. इधर BCCL, CCL और ECL की और से राज्य सरकार के पास पहले जमा की गयी 10 से 15 दिन की अग्रिम राशि अव खत्म होने के कगार पर है. कई कंपनियों की यह राशि इसी सप्ताह समाप्त हो रही है. यदि तब तक समाधान नहीं निकला, तो झारखंड से रोजाना निकलने वाले करीव 70 रैक कोयले की ढुलाई थम सकती है.

एक रैक में औसतन 3,500 से 4,000 टन कोयला

एक रैक में औसतन 3,500 से 4,000 टन कोयला होता है. कुल मिलाकर रोजाना करीब ढाई लाख टन कोयले की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. कोयला कंपनियों ने केंद्र को दी स्थिति की जानकारी राज्य में चालान बंद हो जाने की जानकारी राज्य की कोयला कंपनियों ने केंद्र सरकार को दी है, केंद्र ने राज्य सरकार से बात भी की है. इस पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है. कोयला कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी राज्य सरकार के अधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया है. उनको बताया है कि राज्य सरकार के मद में दी जानेवाली राशि जमा नहीं हो पा रही है. इससे आने वाले दिनों में कोयले की ढुलाई बंद हो सकती है. इसमें केंद्र सरकार से हस्तक्षेप का आग्रह किया गया है.

MCL- SECL को आपात आपूर्ति के निर्देश

कोयले की कमी दूर करने की केंद्र ने शुरू की तैयारी झारखंड में कोयले की ढुलाई प्रभावित होने पर उत्पन्न स्थिति से निपटने की तैयारी केंद्र सरकार ने शुरू कर दी है. केंद्र सरकार ने एमसीएल और एसइसीएल को आपात स्थिति में पावर प्लांटों को कोयला आपूर्ति के लिए तैयार रहने के लिए कहा है. मंत्रालय ने इस मामले में रेलवे से वात भी की है. देश में अभी करीब 250 गीगावाट बिजली की खपत हो रही है. बीते साल इस दौरान करीब 235 गीगावाट बिजली की खपत हुई थी. करीब 15 गीगावाट अधिक बिजली की खपत पूरा करने के लिए कोयले की मांग भी अधिक हो रही है.

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