कोयला संकट का झारखंड में दिखने लगा असर, लोड शेडिंग से करनी पड़ रही है बिजली की आपूर्ति

Updated at : 23 Apr 2022 11:13 AM (IST)
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कोयला संकट का झारखंड में दिखने लगा असर, लोड शेडिंग से करनी पड़ रही है बिजली की आपूर्ति

झारखंड कोयले संकट का असर दिखने लगा है, बिजली की कमी को पूरा करने के लिए राज्य में लोड शेडिंग की जा रही है. ग्रामीण इलाकों में तो पांच से छह घंटे की कटौती की जा रही थी. राज्य में रोजाना मांग की तुलना में महज 400 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन हो रहा है.

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रांची: पावर प्लांटों में कोयला संकट का असर झारखंड में साफ दिख रहा है. बिजली उत्पादक कंपनियों ने झारखंड की बिजली आपूर्ति में कटौती कर दी है. ऐसे में बिजली की कमी को पूरा करने के लिए पूरे राज्य में लोड शेडिंग की जा रही है. शुक्रवार शाम पांच बजे से ही राज्य के विभिन्न जिलों में लोड शेडिंग शुरू हो गयी. यानी एक जगह की बिजली काट कर दूसरी जगह आपूर्ति की गयी. राजधानी रांची और जमशेदपुर को छोड़ अन्य जगहों में कई घंटे बिजली गुल रही. ग्रामीण इलाकों में तो पांच से छह घंटे की कटौती की जा रही थी.

जानकारी के अनुसार, राज्य को सामान्य दिनों में 1400 मेगावाट बिजली की डिमांड होती है. गर्मी की वजह से यह डिमांड 1800 मेगावाट या इससे ऊपर चली जाती है. फिलहाल, टीवीएनएल की दो यूनिट से करीब 350 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. वहीं, इनलैंड पावर के 50 मेगावाट के उत्पादन को जोड़ दें, तो झारखंड में रोजाना मांग की तुलना में महज 400 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन हो रहा है.

आधुनिक पावर से 180 मेगावाट और लांग टाइम एग्रिमेंट के तहत कुछ बिजली एनटीपीसी और एनएचपीसी से मिलती है. इसके अलावा मांग के अनुरूप शेष बिजली सेंट्रल एक्सचेंज से खरीदी जाती है. शुक्रवार को राज्य को 1560 मेगावाट बिजली की जरूरत थी. झारखंड ने एक दिन पहले इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीद के लिए बिड किया था. वहां से बिजली मिलने के बावजूद 160 मेगावाट की कमी रह गयी. इसे लोड शेडिंग के जरिये पूरा किया गया.

  • राजधानी रांची और जमशेदपुर को छोड़ कर राज्य के विभिन्न हिस्सों में घंटों हो रही कटौती

  • ग्रामीण इलाकों की हालत सबसे बदतर, चार से पांच घंटे तक हो रही कटौती

ऐसे मैनेज की जा रही डिमांड

1400 मेगावाट बिजली की जरूरत है झारखंड को रोजाना

1800 मेगावाट से ज्यादा मांग पहुंच जाती है गर्मी के मौसम में

1560 मेगावाट बिजली की डिमांड की थी राज्य में शुक्रवार को

160 मेगावाट बिजली की मांग लोड शेडिंग कर पूरी की गयी

सोलर और विंड एनर्जी से मिल रही ठंडक, लेकिन शाम में दिक्कत

सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) द्वारा विंड पावर से उत्पादित बिजली दी जा रही है. पीक आवर (अत्यधिक बिजली खपत के घंटों) सुबह 8 से 10 और शाम 6 से 11 को अगर छोड़ दें, तो झारखंड को राजस्थान से दिन के वक्त दिन के वक्त 250 मेगावाट सोलर और विंड एनर्जी गर्मी में थोड़ी ठंडक प्रदान कर रही है. शाम में दोनों से पावर सप्लाई बंद हो जा रही है और राज्य की निर्भरता कोयला आधारित बिजली पर शिफ्ट हो जा रही है.

ऊर्जा संकट पर हुई राष्ट्रीय स्तर की बैठक झारखंड ने मजबूती से रखी अपनी समस्या

सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के साथ ऊर्जा संकट पर राष्ट्रीय स्तर की बैठक हुई. धुर्वा स्थित ऊर्जा मुख्यालय में ऑनलाइन हुई इस बैठक में महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, गुजरात समेत अन्य राज्यों ने कोयला की कमी के चलते बिजली उत्पादन प्रभावित होने की बात कही. जेबीवीएनएल के अधिकारी ने बताया कि इस बैठक में झारखंड ने भी अपनी ऊर्जा संबंधी समस्याएं मजबूती से रखीं. बताया गया कि एनटीपीसी के चतरा स्थित नॉर्थ कर्णपुरा परियोजना से उत्पादित होनेवाली 1980 मेगावाट में से 500 मेगावाट बिजली मिलनी थी. इस परियोजना को जल्द से जल्द क्रियान्वित किया जाना चाहिए.

Posted By: Sameer Oraon

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