एसटी आयोग की अनुशंसा नहीं मान रही है झारखंड सरकार
Updated at : 29 Sep 2019 1:00 AM (IST)
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रांची : स्वास्थ्य विभाग (झारखंड सरकार) राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अनुशंसा नहीं मान रहा है. अायोग द्वारा सरकार को दिया गया समय दो बार फेल कर गया है. इधर आयोग ने मुख्य सचिव व स्वास्थ्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को स्मार पत्र देकर कहा है कि 20 सितंबर तक कार्रवाई की सूचना नहीं देने […]
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रांची : स्वास्थ्य विभाग (झारखंड सरकार) राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अनुशंसा नहीं मान रहा है. अायोग द्वारा सरकार को दिया गया समय दो बार फेल कर गया है. इधर आयोग ने मुख्य सचिव व स्वास्थ्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को स्मार पत्र देकर कहा है कि 20 सितंबर तक कार्रवाई की सूचना नहीं देने की स्थिति में अाप या अापके प्रतिनिधि को समन भी किया जा सकता है. मामला पीवीटीजी हेल्थ केयर सेंटर, नयानगर बरकाकाना, रामगढ़ का है.
यह अस्पताल आदिम जनजाति विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित तथा अायुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध था, जिसे कुछ आरोपों के मद्देनजर 27 फरवरी को सूची से हटा दिया गया. साथ ही योजना के तहत विभिन्न मरीजों के इलाज के करीब 27 लाख रुपये बिल का भुगतान भी अस्पताल प्रबंधन को नहीं किया गया.
आयुष्मान भारत योजना का संचालन कर रही एजेंसी झारखंड राज्य अारोग्य समिति के अनुसार यह कार्रवाई अस्पताल प्रबंधन को सात फरवरी को ई-मेल के माध्यम से किये गये शो कॉज का जवाब नहीं देने पर की गयी है, पर जांच में यह बात सामने आयी कि जिस ई-मेल का इस्तेमाल अस्पताल प्रबंधन को शो कॉज करने के लिए किया गया था, वह गलत था.
प्रावधान का उल्लंघन किया गया
मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष अनुसुईया उइके व सदस्य माया चिंतामन इवनाते ने 14 जून को रांची के स्टेट गेस्ट हाउस, मोरहाबादी में सुनवाई की थी. सुनवाई के बाद आयोग ने अपनी टिप्पणी में लिखा- तथ्यों से स्पष्ट है कि पीवीटीजी अस्पताल को संबद्धता सूची से हटाने के लिए अायुष्मान भारत योजना के निर्धारित प्रावधान का उल्लंघन किया गया है.
अस्पताल के विरुद्ध गलत, द्वेषपूर्ण व तंग करनेवाले मामले सहित अन्य प्रक्रिया अपनायी गयी है. जो अनुसूचित जाति या जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के तहत अपराध है. यदि कोई लोक सेवक अपराध करता है, तो वह कम से कम एक वर्ष के कारावास का भागी होगा.
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