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पीएम मोदी से पुरस्कृत किरण देवी ने कहा, लाखों का खर्च कर शुरू किया सैनिटरी पैड का काम, अब नहीं मिल रहा सहयोग

Updated at : 27 Aug 2019 4:35 PM (IST)
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पीएम मोदी से पुरस्कृत किरण देवी ने कहा, लाखों का खर्च कर शुरू किया सैनिटरी पैड का काम, अब नहीं मिल रहा सहयोग

रांची : सैनिटरी पैड का काम जिस भरोसे से शुरू किया था, वह भरोसा अब टूट रहा है. लाखों का माल पड़ा है लेकिन उसकी खरीद नहीं हो रही. समूह की महिलाओं के रोजगार पर संकट है. कई नेता, सामाजिक कार्यकर्ता आये भरोसा देकर गये लेकिन अबतक इसकी खरीद नहीं हुई. अब मुख्यमंत्री से मिलकर […]

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रांची : सैनिटरी पैड का काम जिस भरोसे से शुरू किया था, वह भरोसा अब टूट रहा है. लाखों का माल पड़ा है लेकिन उसकी खरीद नहीं हो रही. समूह की महिलाओं के रोजगार पर संकट है. कई नेता, सामाजिक कार्यकर्ता आये भरोसा देकर गये लेकिन अबतक इसकी खरीद नहीं हुई. अब मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें सारी बात बतायेंगे. उपरोक्त बातें सेनेटरी पैड बनाने वाली किरण देवी ने कही. किरण देवी वही महिला हैं जिन्हें साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डिजिटल इंडिया में बेहतर योगदान के लिए पुरस्कार मिला.

गांव की महिलाओं को समझाना था मुश्किल
साल 2018 में किरण देवी ने सैनिटरी पैड का काम शुरू किया. किरण देवी कहती हैं, जब मुझे डिजिटल इंडिया के लिए पुरस्कार मिला तो मेरी मुलाकात केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से हुई. उन्होंने बातों – बातों में सेनेटरी पैड की बात कही, गांव की महिलाओं की स्थिति का जिक्र किया और माहवारी स्वच्छता से जुड़कर काम करने के लिए प्रेरित किया. मैंने महसूस किया है कि इस दिशा में काम करना चाहिए. मैंने घर आकर इस पर काम शुरू किया. हमने लगभग तीन लाख का खर्च करके मशीनें मंगवाई, कच्चा माल मंगवाया. गांव की महिलाओं को इसमें काम करने के लिए बहुत समझाना पड़ा. कभी घर वाले नहीं मानते थे कहते थे ये काम तो चोरी छुपे किया जाता है तुमलोग इतना क्यों बात कर रही हो. गांव के लोगों को समझाकर काम शुरू किया. हमारी टीम में शुरुआत में 8 महिलाओं ने काम किया जिसमें से एक विकलांग है, दूसरी विधवा है. इन महिलाओं की मुलाकात स्मृति ईरानी से भी हुई. सैनिटरी पैड से इन महिलाओं का रोजगार जुड़ा था.
अब समस्या क्या है
किरण बताती हैं कि हमने पूरे जोश के साथ काम शुरू किया. शुरुआत में हमने पैड बना लिये. कस्तूरबा बालिका की कुछ बच्चियों को हमने मुफ्त में पैड दिया. हम कई बार मुफ्त में बच्चियों को पैड देते रहे, उन्होंने इस्तेमाल के बाद बताया भी कि हमारा प्रोडक्ट बेहतर है. अब समस्या इसकी बिक्री को लेकर आ रही है. हमारे पास इसके लिए बाजार नहीं है. नेता, सरकारी अधिकारी, समाजिक कार्यकर्ता, सामाजिक संस्था, डॉक्टर सभी ने हमें आश्वासन दिया कि पैड खरीदेंगे लेकिन इसकी बिक्री नहीं हो रही है. यह हमारे लिए बड़ी समस्या बन गयी है, इसलिए हम सरकार से सहयोग की अपील करेंगे.
जानें माहवारी स्वच्छता की देश में क्या है स्थिति
देशभर में मात्र 12 फीसदी महिलाएं सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करती हैं. कपड़े और अन्य अनहाइजेनिक चीजों का प्रयोग करने के कारण महिलाएं कई तरह की बीमारियों का शिकार होती हैं. उन्हें स्वच्छता के लिए प्रेरित करने और बीमारियों से बचाने के लिएसरकार लगातार प्रयास कर रही है लेकिन सुधार की गति धीमी है . नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार 2016-17 में पूरे देश में 62 प्रतिशत महिलाएं अपने मासिक धर्म के दौरान कपड़े पर निर्भर रहती हैं. वहीं झारखंड में 81 प्रतिशत महिलाएं अभी भी अनहाइजेनिक प्रैक्टिस करती हैं.
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