रांची : सामाजिक कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों पर दर्ज केस वापस हो

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रांची : झारखंड आदिवासी अधिकार मंच और वीमेंस अगेंस्ट सेक्सुअल वायलेंस एंड स्टेट रिप्रेशन ने पत्थलगड़ी अौर कोचांग गैंग रेप के बाद खूंटी में पुलिस-प्रशासन द्वारा मानवाधिकार के हनन पर चिंता व्यक्त की है. दोनों संगठनों की अोर से उनके प्रतिनिधि प्रफुल्ल लिंडा, राधिका अौर आलोका ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में मांग की है […]

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रांची : झारखंड आदिवासी अधिकार मंच और वीमेंस अगेंस्ट सेक्सुअल वायलेंस एंड स्टेट रिप्रेशन ने पत्थलगड़ी अौर कोचांग गैंग रेप के बाद खूंटी में पुलिस-प्रशासन द्वारा मानवाधिकार के हनन पर चिंता व्यक्त की है.
दोनों संगठनों की अोर से उनके प्रतिनिधि प्रफुल्ल लिंडा, राधिका अौर आलोका ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में मांग की है कि रांची अौर खूंटी के सामाजिक कार्यकर्ताअों अौर निर्दोष ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज फर्जी मामले को वापस लेने व खूंटी के कई इलाके में गांव के स्कूलों और पंचायत भवनों में रह रहे पुलिस कर्मियों को हटाने की मांग की गयी, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो.
प्रतिनिधियों ने यह मांग भी की है कि कोचांग गैंग रेप के वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये. राधिका अौर आलोका ने कहा कि घटना के बाद फैक्ट फाइंडिंग टीम ने खूंटी का दौरा किया था. उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि महज फेसबुक पोस्ट के आधार पर कुछ लोगों को देशद्रोही करार दे दिया जाता है. खूंटी के ग्रामीण सरकार द्वारा माइनिंग कंपनियों के लिए बनाये जा रहे लैंड बैंक से खफा थे और इसी का विरोध ग्रामसभा द्वारा कर रहे थे. पर इन मामलों को अलग ही रंग दे दिया गया.
पुलिस के लाठीचार्ज के बाद एक ग्रामीण की मौत भी हो गयी, पर उस मामलेमें जांच आगे नहीं बढ़ रही है. प्रफुल्ल लिंडा ने कहा कि पत्थलगड़ी आदिवासी समाज की परंपरा रही है. वे पूर्वजों की कब्र पर, गांव के सीमांकन के लिए अौर अन्य खास अवसरों पर पत्थलगड़ी करते रहे हैं.
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