झारखंड आंदोलनकारियों को करें सम्मानित, नहीं तो होगा आंदोलन

Updated at : 11 Nov 2018 12:52 AM (IST)
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झारखंड आंदोलनकारियों को करें सम्मानित, नहीं तो होगा आंदोलन

रांची : झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा की राज्यस्तरीय बैठक शनिवार को प्रेस क्लब में हुई. बैठक में आंदोलनकारियों की लंबित मांगों पर चर्चा हुई. कहा गया कि सरकार स्थापना दिवस पर झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मानित करे. साथ ही नौकरी/मुआवजा अौर पेंशन की घोषणा की जाये नहीं तो राज्य के सभी जिलों में धरना/घेराव कार्यक्रम आयोजित किये […]

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रांची : झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा की राज्यस्तरीय बैठक शनिवार को प्रेस क्लब में हुई. बैठक में आंदोलनकारियों की लंबित मांगों पर चर्चा हुई. कहा गया कि सरकार स्थापना दिवस पर झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मानित करे. साथ ही नौकरी/मुआवजा अौर पेंशन की घोषणा की जाये नहीं तो राज्य के सभी जिलों में धरना/घेराव कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. बैठक में कई प्रस्ताव भी पारित किये गये.
मोर्चा के संयोजक मुमताज खान ने कहा कि आंदोलनकारियों के साथ न तो सरकार है अौर न ही विपक्ष. सभी पार्टी सिर्फ कुर्सी चाहती है. उन्हें सोचना चाहिए कि आज जिस कुर्सी पर बैठे हैं, वह किसकी बदौलत हासिल हुई है. अलग-अलग कैटेगरी में करके आंदोलनकारियों को बांटने का कार्य किया गया है, जो गलत है. एक तरफ राज्य स्थापना दिवस पर मुंबई के कलाकारों को गाना गाने के लिए बुलाया जा रहा है. इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारियों को देने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है.
आंदोलनकारी अौर झारखंड आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग के सदस्य सुनील फकीरा ने कहा कि हमलोगों के आयोग में आने से पहले जैसे तैसे काम हो रहा था. कई कारणों से चिह्नितीकरण का काम बाधित पड़ा था. हमलोगों ने काम सुचारु ढंग से हो इसके लिए पहल की. प्रशासनिक पदाधिकारियों के नकारात्मक रवैये का सामना करना पड़ा. हमलोग अपने दायरे में रहकर काम करने की कोशिश कर रहे हैं.
सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं आंदोलनकारी
देवशरण भगत ने कहा कि पहले आंदोलनकारियों के नाम से पदाधिकारी कांपते थे, लेकिन अब वे वैल्यू नहीं देते हैं. मोर्चा अपने स्तर पर झारखंड आंदोलनकारियों को एकजुट करने का प्रयास कर रहा है. गत 18 सालों में किसी भी सरकार की प्राथमिकता में आंदोलनकारी नहीं रहे. आयोग एक अौपचारिकता भर है. इतने वर्षों में मात्र तीन हजार से कुछ ज्यादा आंदोलनकारी चिह्नित हुए हैं, तो 70 हजार आवेदनों को चिह्नित करने में अौर 70 साल लग जायेंगे.
विश्वनाथ भगत ने कहा कि झारखंड राज्य बनाने में झारखंड आंदोलनकारियों की अहम भूमिका रही है, पर राज्य बनते ही सरकार का रवैया आंदोलनकारियों के खिलाफ रहा है. आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग को सरकार ने बांधने का काम किया. बैठक में विमल कच्छप, शफीक आलम, डेमका सोय, हर मोहन साहू, सुशीला एक्का, जयश्री दास, सीता रानी जैन, जुबैर अहमद, अजय नाथ शाहदेव सहित अन्य उपस्थित थे.
ये है प्रस्ताव में
मुख्यमंत्री 15 नवंबर (राज्य स्थापना दिवस) पर सभी आंदोलनकारियों को सम्मानित करें. पेंशन का भुगतान करें तथा मुआवजा तथा नियुक्ति पत्र दें.
सरकार झारखंड आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग की अवधि विस्तार करे. सभी आंदोलनकारियों को एक कोटि में रखकर कम से कम 20 हजार प्रतिमाह पेंशन दे.
मांगें नहीं पूरी होने पर एक दिसंबर को सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन करने, आगामी विधानसभा सत्र में विधानसभा का घेराव करने अौर सभी मंत्रियों के गृह जिला या उनके घर के समक्ष प्रदर्शन करने का भी निर्णय लिया गया.
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