रांची : कोल इंडिया के शेयर बेचने को लेकर यूनियनों ने जताया विरोध

Updated at : 04 Nov 2018 10:00 AM (IST)
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रांची : कोल इंडिया के शेयर बेचने को लेकर यूनियनों ने जताया विरोध

रांची : दिल्ली में शनिवार को कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव आशीष उपाध्याय की अध्यक्षता में ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई. सदस्यों ने कोल इंडिया के विनिवेश का मामला उठाते हुए तीन फीसदी शेयर बेचने का विरोध किया. कहा कि इससे कोल इंडिया के निजीकरण का रास्ता साफ हो रहा है. पहले से […]

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रांची : दिल्ली में शनिवार को कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव आशीष उपाध्याय की अध्यक्षता में ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई. सदस्यों ने कोल इंडिया के विनिवेश का मामला उठाते हुए तीन फीसदी शेयर बेचने का विरोध किया. कहा कि इससे कोल इंडिया के निजीकरण का रास्ता साफ हो रहा है. पहले से ही कंपनी में आउट सोर्सिंग के भरोसे उत्पादन हो रहा है. अब धीरे-धीरे विनिवेश की सीमा बढ़ायी जा रही है.
यह कदम कोल इंडिया के हित में नहीं है. मजदूर यूनियन इसका आनेवाले दिनों में व्यापक विरोध करेंगे. बैठक में कोल इंडिया में आश्रितों को नौकरी दिये जाने के मामले पर भी विचार किया गया. प्रबंधन ने आश्वस्त किया कि आश्रितों को नौकरी दी जायेगी. दिसंबर माह तक इससे संबंधित आदेश सभी कोयला कंपनियों को भेज दिया जायेगा. बैठक में कॉमर्शियल माइनिंग का मुद्दा भी उठा, जिसका एटक ने विरोध किया. चिकित्सकों की बहाली प्रक्रिया दिसंबर के पहले सप्ताह में पूरी करने का आश्वासन प्रबंधन ने दिया. मजदूर यूनियनों ने नीचे पदों पर भी बहाली करने का आग्रह किया. बैठक में बसंत राय, एजी श्रीवास्तव, नाथूलाल पांडेय, लखन लाल महतो भी मौजूद थे. प्रबंधन की ओर से कोल इंडिया चेयरमैन एके झा, कोल इंडिया के साथ-साथ सभी कंपनियों के निदेशक कार्मिक भी मौजूद थे.
छठ के बाद रांची में होगी यूनियनों की बैठक
इससे पूर्व ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधियों की बैठक दिल्ली में हुई. इसमें कोल इंडिया के शेयर बेचे जाने का विरोध करने का निर्णय लिया गया. साथ ही तय किया गया कि आंदोलन में इंटक को भी शामिल किया जायेगा. इसके लिए राजेंद्र सिंह से संपर्क कर छठ के बाद रांची में बैठक करने का निर्णय लिया गया.
रांची. हाइकोर्ट में माइनिंग परिवहन चालान निर्गत करने को लेकर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने प्रार्थी की दलील को स्वीकार नहीं करते हुए बाद में सुनवाई करने की बात कही. इससे प्रार्थी मेसर्स निर्मल कुमार को राहत नहीं मिल पायी. 22 नवंबर को मामले की सुनवाई होगी. प्रार्थी की अोर से खंडपीठ को बताया गया कि हाइकोर्ट के आदेश के आलोक में सरकार द्वारा मांगे गये 200 करोड़ रुपये में से प्रथम किस्त के तहत 30 करोड़ का भुगतान किया गया, लेकिन 36 घंटे बीत जाने के बाद भी माइनिंग परिवहन चालान सरकार ने निर्गत नहीं किया है. सरकार कोर्ट के आदेश की अवमानना कर रही है.
अब दूसरी किस्त का भी समय आ गया है. 24 नवंबर को पुन: 30 करोड़ जमा करना है. माइनिंग कार्य बंद है. बिजनेस नहीं हो पा रहा है. दूसरी किस्त की राशि जमा करने का समय बढ़ाने का आग्रह किया गया. महाधिवक्ता अजीत कुमार ने प्रार्थी की दलील का विरोध किया. कहा कि पैसा सरकार का है. उसे आपको जमा करना होगा. महाधिवक्ता श्री कुमार ने सरकार से निर्देश प्राप्त कर कोर्ट को अवगत कराने की बात कही.
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