रांची : बाइक की मरम्मत कर एमए कर रहा आदिम जनजाति का अनुरंजन समद
Author Prabhat khabar digital desk
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मैट्रिक से स्नातक तक फर्स्ट क्लास में पास हुआ, लेकिन आज तक सरकार से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली सुनील कुमार झा रांची : सरकार राज्य में आदिम जनजाति के विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए कई योजनाएं चला रही है, पर इसका लाभ सभी विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा है. गढ़वा जिला का भंडरिया निवासी […]
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मैट्रिक से स्नातक तक फर्स्ट क्लास में पास हुआ, लेकिन आज तक सरकार से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली
सुनील कुमार झा
रांची : सरकार राज्य में आदिम जनजाति के विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए कई योजनाएं चला रही है, पर इसका लाभ सभी विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा है.
गढ़वा जिला का भंडरिया निवासी अनुरंजन समद ने स्नातक तक की पढ़ाई पूरी कर इसी वर्ष डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में पीजी में नामांकन लिया है. उसने मोटरसाइकिल वर्कशॉप सेंटर में काम कर अब तक की पढ़ाई पूरी की है. कारण है कि अब तक पढ़ाई के लिए सरकार से कोई खास मदद नहीं मिली है. अनुरंजन ने बताया कि वह आदिम जनजाति (कोरवा) का विद्यार्थी है. आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. पिता गांव में खेती करते हैं.
मैट्रिक से लेकर स्नातक तक की परीक्षा उसने प्रथम श्रेणी से पास की है. उसने छात्रवृत्ति के लिए भी आवेदन जमा किया था, लेकिन नहीं मिली. कोकर स्थित मोटरसाइकिल वर्कशॉप में काम करने के बाद जो कुछ पैसा मिलता है उससे पढ़ाई कर रहा है. आर्थिक तंगी के कारण वह प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी नहीं कर पा रहा है. उसने मैट्रिक संत पॉल हाइस्कूल व इंटर की परीक्षा संत जॉन इंटर कॉलेज से पास की है. स्नातक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि से किया. अब पीजी हिंदी विषय से कर रहा है. अनुरंजन ने सभी प्रकार के शुल्क माफी के लिए विवि के कुलपति को आवेदन दिया है.
मामूली तनख्वाह में भाई को भी पढ़ाता है
अनुरंजन को आठ हजार रुपये मिलते हैं. इसमें वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ छोटे भाई को भी पढ़ाता है. उसका भाई संत पॉल इंटर कॉलेज से इंटर कर रहा है. उसने बताया कि आदिम जनजाति के विद्यार्थियों की पढ़ाई व अन्य योजना के तहत मिलनेवाला लाभ उसे नहीं मिला. इंटर व स्नातक में भी उसका शुल्क माफ नहीं हुआ. वह रेलवे प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा है. सरकार के स्तर से मदद मिल जाती तो ठीक से तैयारी कर पाता.
विवि में सभी शुल्क माफ करने का प्रावधान
मालूम हो कि आदिम जनजाति के विद्यार्थियों से पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है. पढ़ाई पूरी तरह नि:शुल्क है. इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से छात्रवृत्ति भी दी जाती है
पढ़ाई के लिए सरकार से मदद की मांग
झारखंड छात्र मोर्चा के अजीत विश्वकर्मा व छात्र नेता अमिताभ कुमार ने कहा है कि सरकार अनुरंजन की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाये. उन्होंने सरकार से आर्थिक मदद देने की मांग की है. कहा कि अनुरंजन की मदद को लेकर मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल कुलपति व सरकार के अधिकारियों से मिलेगा.
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