झारखंड में निधि खरे ने एमबीबीएस की सीटें बढ़वाने में दिया योगदान
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Sep 2018 7:08 AM
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राज्य में पिछले 18 वर्षों से लंबित चल रहा था मामला, निधि खरे ने किया प्रयास रांची : स्वास्थ्य विभाग में सचिव के रूप में काम करते हुए निधि खरे ने राज्य में डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है. राज्य में फिलहाल एमबीबीएस की 350 सीटें ही हैं. श्रीमती खरे […]
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राज्य में पिछले 18 वर्षों से लंबित चल रहा था मामला, निधि खरे ने किया प्रयास
रांची : स्वास्थ्य विभाग में सचिव के रूप में काम करते हुए निधि खरे ने राज्य में डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है.
राज्य में फिलहाल एमबीबीएस की 350 सीटें ही हैं. श्रीमती खरे के प्रयास से सीटों की संख्या बढ़ कर 1250 हो जायेंगी. अगले शैक्षणिक सत्र से राज्य के नये मेडिकल कॉलेजों में 600 सीटों पर दाखिला लेकर पढ़ाई शुरू कर दी जायेगी. वहीं, 350 सीटों पर पहले की ही तरह पढ़ाई जारी रहेगी. यानी, अगले शैक्षणिक सत्र से राज्य में कुल 950 एमबीबीएस की सीटों पर एडमिशन लेकर पढ़ाई करायी जायेगी.
अगले शैक्षणिक सत्र से जिन नये कॉलेजों में नामांकन का फैसला किया गया है, उसमें मणिपुर के सहयोग से टीएमएच में शुरू किये जाने वाले 150, देवघर एम्स में 150, दुमका में 100, हजारीबाग में 100 और पलामू में 100 सीटों पर नामांकन होगा. इसके बाद के शैक्षणिक सत्र में और 300 सीटों पर नामांकन होने की संभावना है. चाईबासा, कोडरमा और बाेकारो मेडिकल कॉलेज में 100-100 सीटों पर नामांकन हो सकेगा.
दो वर्षों के बाद राज्य में 350 के बदले 1250 एमबीबीएस की सीटों पर नामांकन होगा. राज्य में सीटों की संख्या बढ़ाने का मामला पिछले 18 वर्षों से लंबित चल रहा था. 10 वर्ष पहले निधि खरे ने स्वास्थ्य विभाग में ही विशेष सचिव के रूप में काम करते हुए बोकारो में मेडिकल कॉलेज बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी. लेकिन, उनके जाने के बाद यह प्रक्रिया रुक गयी थी.
अब उन्होंने स्वास्थ्य सचिव के रूप में काम करते हुए इसे पूरा किया है. मरीजों के लिए खून की व्यवस्था करने के उद्देश्य से निधि खरे के कार्यकाल में राज्य के आठ जिलों में ब्लड बैंक स्थापित करने का फैसला किया गया. इसके पहले तक राज्य के 16 जिलों में ही ब्लड बैंक की व्यवस्था थी. इससे मरीजों को खून मिलने में परेशानी होती थी. अनाधिकृत रूप से भी ब्लड बैंकों का संचालन हो रहा था.
श्रीमती खरे ने अनाधिकृत रूप से चलने वाले ब्लड बैंकों पर नकेल कसने की दिशा में भी बेहतर काम किया है. स्वास्थ्य सचिव के रूप में पदस्थापन के पूर्व वह वाणिज्य कर और कार्मिक विभाग में भी कार्यरत रही हैं. वाणिज्य कर विभाग में काम करते हुए उन्होंने टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्व में वृद्धि के लिए उपाय किये. कार्मिक एवं प्रशासनिक विभाग में सचिव के रूप में काम करते हुए वर्षों से अफसरों के विरुद्ध लंबित दंडात्मक कार्रवाई को पूरा कराया.
23 के बाद दिल्ली में योगदान देंगी निधि खरे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के झारखंड दौरे के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे अभी दिल्ली नहीं जायेंगी. वह 23 सितंबर के बाद दिल्ली में योगदान करेंगी. श्रीमती खरे को भारत सरकार के गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर पदस्थापित किया गया है.
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