गवर्नर ने स्पीकर से आयोग की रिपोर्ट पर की चर्चा, पूछा, आयोग की अनुशंसा का अनुपालन कैसे करेंगे? अड़चन आये, तो बताएं

Updated at : 24 Jul 2018 7:05 AM (IST)
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गवर्नर ने स्पीकर से आयोग की रिपोर्ट पर की चर्चा, पूछा, आयोग की अनुशंसा का अनुपालन कैसे करेंगे? अड़चन आये, तो बताएं

रांची : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ दिनेश उरांव को नाश्ते पर राजभवन बुलाया. इस दौरान विधानसभा में नियुक्तियों व प्रोन्नतियों में हुई गड़बड़ी पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश विक्रमादित्य आयोग की अनुशंसा की जानकारी दी. कहा कि गलत तरीके से की गयी नियुक्ति व प्रोन्नति के लिए आयोग ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष […]

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रांची : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ दिनेश उरांव को नाश्ते पर राजभवन बुलाया. इस दौरान विधानसभा में नियुक्तियों व प्रोन्नतियों में हुई गड़बड़ी पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश विक्रमादित्य आयोग की अनुशंसा की जानकारी दी. कहा कि गलत तरीके से की गयी नियुक्ति व प्रोन्नति के लिए आयोग ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को दोषी माना है. उनके विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की है. कई कर्मचारियों व अधिकारियों को बर्खास्त करने, वसूली करने आदि की अनुशंसा की है. राज्यपाल ने स्पीकर से पूछा कि वह आयोग की अनुशंसा का अनुपालन कैसे करेंगे. अगर अनुपालन में कोई अड़चन या दिक्कत आती है, तो वह उनसे बता सकते हैं.
तीन पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को माना है दोषी : जानकारी के अनुसार, आयोग ने वर्ष 2000 से 2014 के बीच विधानसभा में हुई नियुक्ति/प्रोन्नति में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी, आलमगीर आलम और शशांक शेखर भोक्ता को दोषी माना है.
तीनों पर आपराधिक मामला दर्ज कराने की अनुशंसा की है. कई कर्मचारियों व अधिकारियों को बर्खास्त करने की भी अनुशंसा की है. आयोग ने माना है कि नियुक्ति व प्रोन्नति में भारी पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं. नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया. अपने-अपने करीबियों व रिश्तेदारों की नियुक्ति गलत तरीके से कर ली गयी है. नियमावली में भी छेड़छाड़ की गयी है.
जस्टिस विक्रमादित्य आयोग ने नियुक्ति को ठहराया है गलत
जांच के मुख्य बिंदु
नियुक्ति/ प्रोन्नति में पिक एंड चूज पद्धति अपनायी गयी
तैयार मेधा सूची में कई रोल नंबर पर ओवर राइटिंग की गयी है
गृह जिला (पलामू) के 13 अभ्यर्थियों को स्थायी डाक-पता पर नियुक्ति पत्र भेजा गया. लेकिन पत्र 12 घंटे में ही अभ्यर्थियों को मिल गया अौर उन्होंने योगदान भी कर दिया
अनुसेवक के लिए नियुक्ति प्रक्रिया द्वारा कथित रूप से चयनित व्यक्तियों को मौखिक रूप से नियुक्त कर लिया गया
गठित नियुक्ति कोषांग में कौशल किशोर प्रसाद और सोनेत सोरेन को शामिल किया गया, जिनके खिलाफ पूर्व अध्यक्ष एमपी सिंह ने प्रतिकूल टिप्पणी की थी
नियुक्ति की कार्रवाई बिना पद रहे आरंभ कर दी गयी या बिना पद के उपलब्ध परिणाम घोषित कर दिये गयेचालकों की नियुक्ति के लिए निकाले गये 28 दिसंबर 2006 के विज्ञापन में विहित अंतिम तिथि तक क्या पार्थसारथी चौधरी ने अपना आवेदन नहीं जमा कराया था. क्या वे तत्कालीन विधायक निरसा अपर्णा सेन गुप्ता के भाई थे, तो किस आधार पर साक्षात्कार के लिए बुलाया गयाचालकों की 17 नियुक्तियों में 14 को एमवीआइ ने जांच में असफल पाया था, बावजूद इसके वे नौकरी पर रख लिये गये
राज्यपाल ने आयोग का गठन किया था
प्रभात खबर ने विधानसभा में नियुक्त व प्रोन्नति में गड़बड़ी से संबंधित खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की, तो राज्यपाल ने जांच के लिए आयोग का गठन किया था. पूर्व में सेवानिवृत्त न्यायाधीश लोकनाथ प्रसाद की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया था. लेकिन वांछित सहयोग नहीं मिल पाने पर उन्होंने त्याग पत्र दे दिया था. इसके बाद सेवानिवृत्त न्यायाधीश विक्रमादित्य की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया. इस आयोग को दो बार विस्तार भी दिया गया.
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