अब जयंती रोहू से मिलेगा ज्यादा लाभ व ज्यादा स्वाद

By Prabhat Khabar Digital Desk
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रांची : कृषि, डेयरी या किसी भी अन्य क्षेत्र का विकास व उत्पादकता की वृद्धि बेहतर प्रजाति के बीज व नस्ल के प्रयोग से ही हुई है. जिस तरह उन्नत किस्म के बीच से कृषि तथा उन्नत नस्ल की गाय से डेयरी का विकास हुआ है, उसी तरह मत्स्य क्षेत्र का विकास भी जयंती रोहू जैसी मछली की प्रजाति के पालन से होगा.
यह बातें राष्ट्रीय कृषि विकास बोर्ड, हैदराबाद के वरीय कार्यकारी निदेशक (तकनीकी) डॉ बीके चांद ने कही. वह मत्स्य निदेशालय, एचइसी में मत्स्य किसानों के लिए अायोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण को संबोधित कर रहे थे.
बोर्ड के सौजन्य से इसका अायोजन मछली की बेहतर प्रजाति जयंती रोहू के मत्स्य किसानों के बीच प्रचार-प्रसार के लिए किया गया था. डॉ चांद ने मछली उत्पादन में झारखंड के प्रयास व सफलता की सराहना की तथा कहा कि इस राज्य ने देश के समक्ष एक मॉडल प्रस्तुत किया है. इससे पहले कृषि सह मत्स्य निदेशक राजीव कुमार ने कहा कि झारखंड में विभिन्न नदियों की लंबाई 1800 किमी तक है. पर हमारी नदियां मौसमी हैं.
इनमें करीब 15 फीट चौड़ा, 40 से लेकर 100 फीट तक लंबा तथा तीन फीट गहरा गड्ढा बना दिया जाये, तो वहां गर्मी में भी पानी रहेगा. यहां मछली पालन हो सकता है. चतरा में यह प्रयोग सफल रहा है. मुख्य कार्यक्रम के बाद के तकनीकी सत्र भी हुआ. कार्यक्रम का संचालन संयुक्त निदेशक, मत्स्य मनोज कुमार ने किया. कार्यक्रम में बिरसा कृषि विवि के प्रो. एके सिंह, उप मत्स्य निदेशक आशीष कुमार, सहायक मत्स्य निदेशक मनोज कुमार तथा मुख्य अनुदेशक प्रदीप कुमार सहित विभिन्न जिलों से आये मत्स्य किसान भी उपस्थित थे.
क्या है जयंती रोहू
डॉ चांद ने बताया कि जयंती रोहू का बीज (फाउंडेशन सीड) उत्तर भारत की विभिन्न नदियों में पायी जाने वाली रोहू मछली में से स्वस्थ, बड़े अाकार व स्वाद वाली मेल व फीमेल मछली का चयन कर इनके प्रजनन (सिलेक्टिव ब्रीडिंग) से तैयार किया गया है. यानी यह रोहू की परिष्कृत प्रजाति है.
यह मछली रोहू की अन्य प्रजातियों से 20 फीसदी बड़ी तथा अधिक स्वादिष्ट होती है. इनके पालन से किसानों की आय तेजी से बढ़ेगी. बोर्ड का लक्ष्य मौजूदा कुल रोहू पालन के कम से कम 30 फीसदी तक जयंती रोहू के पालन का है. बोर्ड झारखंड को जयंती रोहू के बीज मुहैया करायेगा.
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