प्रलेस राज्य सम्मेलन संपन्न : लेखकों ने समय, समाज और पूंजीवाद की चुनौतियों पर किया मंथन

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फोटो फाइल : 26 चितरपुर सी - कार्यक्रम में शामिल प्रलेस के लोग | Prabhat Khabar Network

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रजरप्पा में आयोजित प्रलेस के पांचवें राज्य सम्मेलन में लेखकों ने पूंजीवाद और समकालीन चुनौतियों पर मंथन किया. नई कार्यकारिणी का गठन भी किया गया.

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रजरप्पा : रजरप्पा प्रोजेक्ट स्थित ऑफिसर्स क्लब में आयोजित प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), झारखंड के पांचवें राज्य सम्मेलन के अंतिम दिन रविवार को साहित्य, समाज और समकालीन चुनौतियों पर गंभीर विमर्श हुआ. सम्मेलन में इक्कीसवीं सदी में पूंजीवाद का स्वरूप और लेखकीय चुनौती तथा समय के संकट और लेखन की चुनौती (संदर्भ- प्रेमचंद और समकालीन विमर्श) विषय पर विस्तृत चर्चा की गयी.

मुख्य अतिथि सुखदेव सिंह सिरसा ने नये रचनाकारों से जनपक्षधरता और रचनात्मक प्रतिबद्धता बनाये रखने की अपील की. कथाकार रणेन्द्र ने बदलते दौर में पूंजीवाद के नये स्वरूपों पर प्रकाश डालते हुए कृत्रिम मेधा पूंजीवाद, तकनीकी सामंतवाद और जैव साम्राज्यवाद जैसे विषयों पर विचार रखे. कथाकार पंकज मित्र ने कहा कि आज के समय का सबसे बड़ा संकट यथार्थ को पहचानने में असफल होना है.

लेखक शेखर मल्लिक ने संकट के बीच संभावनाओं को तलाशने की जरूरत बतायी, जबकि शैलेंद्र ने लेखकों से अपने दृष्टिकोण का विस्तार कर नये सवालों से जूझने का आह्वान किया. दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए महादेव टोप्पो ने आदिवासी संघर्ष की समृद्ध परंपरा को रेखांकित किया. वक्ता गजेंद्र ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य अपने समय का इतिहास और आलोचना की कसौटी है.

कार्यक्रम में अहमद बद्र, प्रो. मिथिलेश, सत्यम, संजय सोलोमन, अर्पिता सहित कई साहित्यकार उपस्थित रहे. विभिन्न भाषाओं के कवियों ने काव्य पाठ भी किया. अंत में नई राज्य कार्यकारिणी का गठन किया गया तथा राष्ट्रगान के साथ सम्मेलन का समापन हुआ. नई राज्य कार्यकारिणी में संरक्षक मंडल में शशि कुमार, प्रो. रामानंदन, जयनंदन एवं डॉ. (मो.) जकरिया शामिल किए गये.

अध्यक्ष मंडल में महादेव टोप्पो, प्रो. अहमद, निशी प्रभा एवं डॉ. बी.एन. ओहदार को जिम्मेदारी मिली. रणेन्द्र को कार्यकारी अध्यक्ष, पंकज मित्र, कमल, विनय, डॉ. के.के. लाल, विनय कुमार, अनिता, सुधीर साहू, डॉ. देवदूत सोरेन एवं प्रेमचंद उरांव को उपाध्यक्ष बनाया गया. मिथिलेश महासचिव, शेखर मल्लिक उपमहासचिव तथा कृपा शंकर, नियाज अख्तर, डॉ. प्रज्ञां गुप्ता, डॉ. पार्वती तिर्की, गुंजल, संजय सोलोमन, यदुवंश एवं इकिर मुंडा सचिव मंडल में शामिल किए गये. डॉ. भारती को कोषाध्यक्ष बनाया गया. कार्यकारिणी में डॉ. अख्तर, राकेश मिश्रा, अर्पिता, ज्योति मवि, अजय वर्मा, गौहर अजीज, प्रेम प्रकाश, विनय कुमार शम्मी, डॉ. संजय कुमार सिंह, शिव शंकर प्रसाद, फाल्गु मरीक, कुशवाहा, पंकज श्रीवास्तव, अनुपम कुमार, प्रशांत श्रीवास्तव, पॉवेल कुमार, पार्थो बनर्जी, पूर्णिमा महतो, शिवकुमार, महेंद्र कुमार, शिरोमणि, राजू टोप्पो, प्रियो, सुधीर कुमार एवं ओमप्रभा को शामिल किया गया.


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सुरेंद्र कुमार

लेखक के बारे में

By सुरेंद्र कुमार

सुरेंद्र कुमार चितरपुर क्षेत्र से प्रभात खबर के साथ लगभग 30 वर्षों से जुड़ कर पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं. समाचार संकलन के दौरान सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक तथा जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से पाठकों तक पहुंचाने का निरंतर प्रयास करते हैं. वह निष्पक्ष, तथ्यपरक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के प्रति सदैव प्रतिबद्ध हैं.

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