श्रीकृष्ण के जीवन से क्या सीखें? जन्माष्टमी पर पतरातू सेवाकेंद्र में बताया गया आध्यात्मिक संदेश
कृष्ण का रूप धारण किये बच्चे व अन्य | Prabhat Khabar Network
पतरातू में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई गई. ब्रह्माकुमारीज ने श्रीकृष्ण के आदर्शों और उनके जीवन से पवित्रता व मर्यादा की सीख लेने का आह्वान किया.
पतरातू. पीटीपीएस रोड नंबर-08 स्थित ब्रह्माकुमारीज पतरातू सेवाकेंद्र में बुधवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. इस अवसर पर आध्यात्मिक प्रवचन, श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र पर चर्चा तथा राजयोग के महत्व पर प्रकाश डाला गया.
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कार्यक्रम में सेवाकेंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी रोशनी बहन ने कहा कि श्रीकृष्ण को भारतीय संस्कृति में सौंदर्य, सद्गुण, पवित्रता और मर्यादा का प्रतीक माना गया है. उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी केवल श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और गुणों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देने वाला अवसर है.श्रीकृष्ण को सर्वगुण संपन्न और सोलह कला संपूर्ण बताया गया है.
उनके जीवन से मन को विकारों से दूर रखने और श्रेष्ठ आचरण की प्रेरणा मिलती है. गीता देवी ने कहा कि श्रीकृष्ण के स्वरूप का स्मरण मन को शांति और आनंद प्रदान करता है. राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके रामदेव ने श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि उनके चरित्र को केवल बाहरी दृष्टि से देखने के बजाय उसके आध्यात्मिक संदेश को समझने की जरूरत है.
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