राष्ट्रीय ज्ञान परंपरा के बिना ज्ञान अधूरा है

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रामशोभा कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

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रामगढ़. रामशोभा कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. पहले दिन इस संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विभागाध्यक्ष सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड के डॉ विमल किशोर, आरआईई, भुवनेश्वर डॉ पीसी अग्रवाल, प्रो वीसी विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के डॉ मिथिलेश कुमार सिंह, संत कोलंबा कालेज, हजारीबाग डॉ शत्रुघ्न कुमार पांडेय, निदेशक स्नेह नमन, स्नेह सुमन, डॉ रामकेश पांडेय, प्राचार्य, जलान टीचर्स ट्रेंनिंग कॉलेज रांची आदित्य प्रकाश , प्राचार्य उदय मेमोरियल बीएड कॉलेज रांची डॉ पंकज कुमार चंदन, प्राचार्य डॉक्टर ज्योति वालिया, डीन प्रोफेसर विनोद कुमार यादव, विभागध्यक्ष डॉ अवध किशोर सिंह आईक्यूएसी समन्यवक अभिषेक कुमार पांडेय व सभी व्याख्याता ने संयुक्त रूप से गोष्ठी का शुभारंभ किया. सर्वप्रथम प्राचार्या डा ज्योति वालिया ने सभी गणमान्य अतिथियों, शिक्षाविदों विभिन्न राज्यों से आए हुए शोधार्थियों का स्वागत किया और विषय पर विस्तृत प्रकाश डाला. मुख्य संरक्षक डॉ मिथिलेश कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय ज्ञान परंपरा के बिना ज्ञान अधूरा है. मुख्य अतिथि विमल किशोर ने कहा कि राष्ट्रीय ज्ञान परंपरा को अपनाना बेहद जरूरी है क्योंकि बिना ज्ञान के मनुष्य का जीवन सुखमय नहीं हो सकता है. मुख्य वक्ता के रूप में डॉक्टर एसके पांडेय ने कहा कि आज के शिक्षा नीति को ज्ञान परंपरा के आधार चलाना आवश्यक है पर नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप हो. कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रो डॉ विनोद कुमार यादव के द्वारा किया गया.

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