IPL गोलीकांड के 10 साल बाद भी जख्म ताजा, शहीद परिवार पूछ रहे- आखिर कब बदलेगी जिंदगी?
स्व. दशरथ नायक के परिजन फोटो फाइल | Prabhat Khabar Network
आईपीएल गोलीकांड के 10 साल बाद भी शहीद परिवारों की स्थिति नहीं बदली। रामगढ़ की राजनीति बदली, लेकिन विकास और न्याय के वादे आज भी अधूरे हैं।
गोला: 29 अगस्त 2016 यह तारीख बरियातू और आसपास के लोगों के लिए सिर्फ कैलेंडर का एक दिन नहीं, बल्कि एक ऐसी घटना की याद है. जिसने दो परिवारों से उनका सहारा छीन लिया और रामगढ़ की राजनीति को नयी दिशा दी. अपने हक-अधिकार और न्याय की मांग को लेकर आईपीएल के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में रामलखन महतो और दशरथ नायक शहीद हो गये थे, जबकि दर्जनों आंदोलनकारी घायल हुए थे.
आपके शहर में
घटना को दस वर्ष बीत गये, लेकिन शहीद परिवारों की जिंदगी में आज भी संघर्ष कम नहीं हुआ है. शहादत दिवस पर शनिवार को रामगढ़ विधायक ममता देवी ने शहीद रामलखन महतो और दशरथ नायक की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने शहीदों के परिजनों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया.
मौके पर पूर्व विधानसभा प्रत्याशी बजरंग महतो, राजीव जायसवाल, अमित महतो, मनोज पुजहर, कमलेश महतो, मानिक पटेल, बासुदेव प्रसाद, चंदन प्रसाद, मनोज कोटवार, लखेश्वर महतो समेत कई आंदोलनकारी और स्थानीय लोग मौजूद थे.
एक शहादत, दो परिवार और दस साल का संघर्ष
रामलखन महतो की शहादत के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनकी पत्नी के कंधों पर आ गयी. दस वर्ष बाद भी वह आईपीएल प्लांट में दैनिक मजदूरी कर परिवार का गुजर-बसर कर रही हैं. पति को खोने के बाद परिवार को आर्थिक सुरक्षा और स्थायी रोजगार की उम्मीद थी, लेकिन आज भी रोज की मेहनत ही उनके जीवन का आधार बनी हुई है.
दशरथ नायक के परिवार की कहानी और भी पीड़ादायक है. घटना के बाद उनकी पत्नी मानसिक रूप से बीमार हो गयीं. परिवार का सहारा पहले पति की मौत से छिन गया और बाद में बड़े बेटे संतोष नायक की भी मौत हो गयी. अब छोटे बेटे मंतोष नायक प्रदेश में मजदूरी कर परिवार का सहारा बने हुए हैं. उनकी पत्नी भी लोगों के घरों में बर्तन साफ कर अपनी सास और बच्चों के भरण-पोषण में सहयोग करती हैं. शहादत के दस साल बाद भी यह परिवार संघर्ष की उसी राह पर खड़ा है.
बदली राजनीति, लेकिन सवाल वही
आईपीएल गोलीकांड के बाद रामगढ़ विधानसभा की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला. वर्ष 2019 में ममता देवी पहली बार विधायक बनीं. बाद में इसी मामले में जेल जाने के कारण उन्हें विधायक पद गंवाना पड़ा और उपचुनाव में सुनीता चौधरी विधायक निर्वाचित हुईं. इसके बाद ममता देवी दोबारा रामगढ़ की विधायक बनीं. इस लिहाज से गोलीकांड को रामगढ़ की राजनीति में बदलाव की महत्वपूर्ण वजहों में गिना जाता है. लेकिन आंदोलन जिन मुद्दों को लेकर हुआ था, उनमें कई समस्याएं आज भी जस की तस हैं. बरियातू चौक से आईपीएल प्लांट तक जर्जर सड़क इसका उदाहरण है. बारिश में सड़क कीचड़ में बदल जाती है और गर्मी में धूल उड़ती है. स्थानीय लोगों को आवागमन के साथ प्रदूषण की समस्या भी झेलनी पड़ती है.
सिर्फ तस्वीर पर फूल चढ़ाना काफी नहीं
नागरिक चेतना मंच के अध्यक्ष सुनील चक्रवर्ती कहते हैं कि दस वर्ष पूर्व बीस सूत्री मांग को लेकर मंच के नेतृत्व में आंदोलन किया गया था. जिस मांग को लेकर आंदोलन हुआ, वह इतने वर्षों बाद भी पूरी नहीं हो पायी है. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि आज भी शहीद हुए दोनों परिवार कष्ट में जीवन गुजार रहे हैं और सड़क की स्थिति बदहाल है. लोगों को प्रदूषण और खराब सड़क से होकर गुजरना पड़ रहा है.
सुनील चक्रवर्ती ने कहा कि हम सिर्फ दोनों शहीदों की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देना ही अपना कर्तव्य समझने लगे हैं, जबकि शहीदों की शहादत का वास्तविक सम्मान तभी होगा, जब उनके परिवारों की स्थिति सुधरे और जिन मांगों को लेकर आंदोलन हुआ था, उन्हें पूरा किया जाये. आईपीएल गोलीकांड के दस वर्ष बाद बरियातू की सड़क और शहीद परिवारों की जिंदगी एक साथ सवाल खड़े कर रही है.
एक तरफ राजनीतिक बदलाव की लंबी कहानी है, तो दूसरी तरफ उन परिवारों की रोजमर्रा की जद्दोजहद, जिन्होंने इस आंदोलन में अपना सब कुछ खो दिया. ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या शहादत सिर्फ हर वर्ष श्रद्धांजलि तक सीमित रह जायेगी, या कभी उन परिवारों और क्षेत्र की मूल समस्याओं का स्थायी समाधान भी होगा?
यह भी पढ़ें: ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों सावधान! रामगढ़ में चालान से लेकर पेट्रोल बंद तक की तैयारी
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए