पाटन के इस इलाके में एक माह से जलजमाव, जूते-चप्पल हाथ में लेकर स्कूल जाते हैं बच्चे
जर्जर सड़क के गड्ढे मे भरा पानी व बच्चे को साइकिल पर बैठाकर स्कूल ले जाते पिता : प्रभात खबर
पलामू के पाटन प्रखंड के केल्हार मुख्य मार्ग पर जलजमाव से स्कूली बच्चों और ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है. प्रशासन के आश्वासन के बाद भी समस्या जस की तस है.
रामनरेश तिवारी रिपोर्ट
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पलामू जिले के पाटन प्रखंड के केल्हार का मुख्य मार्ग पर पिछले करीब एक माह से अधिक से जलजमाव हो गया है. जिससे लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है. लेकिन इसका स्थाई निदान को लेकर कोई पदाधिकारी गंभीर नहीं हैं.
पाटन मुख्य मार्ग से केल्हार जाने का मुख्य मार्ग है
पाटन पीडब्ल्यूडी मुख्य मार्ग से केल्हार आने जाने का एक मात्र सड़क है. इस सड़क से प्रतिदिन सैकड़ों लोगों के अलावे स्कूली छात्र-छात्राएं आते जाते हैं. जलजमाव के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हो जाती है.
जूता चप्पल हाथ में लेकर आना जाना पड़ता है
इस मार्ग से आने जाने वाले लोगों व स्कूली बच्चों को जूता चप्पल हाथ में लेकर इधर से उधर आना जाना पड़ता है. इस क्रम में छोटे छोटे स्कूली बच्चे कई बार गिर कर भींग जाते हैं. जिससे उन्हें घर वापस लौट जाना पड़ता है.
जनप्रतिनिधि के पास गुहार लगाकर थक चुके हैं लोग
केल्हार के ग्रामीणों ने उक्त समस्या को लेकर दर्जनों बार प्रशासनिक पदाधिकारी से मिलकर गुहार लगाकर थक चुके हैं. लेकिन सिर्फ आश्वासन के अलावे कुछ भी नहीं मिला. प्रखंड के पंचायत प्रतिनिधि व प्रखंड प्रशासन मिलकर भी ग्रामीणों की समस्याओं का स्थाई निदान नहीं कर पाए. सड़क पर जलजमाव नहीं हो. ग्रामीणों को आवागमन में सहूलियत हो, इसे लेकर प्रखंड के त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि और प्रखंड प्रशासन मिलकर भी स्थाई निदान नहीं कर पाए.
वर्ष 2024 में प्रमुख, बीडीओ, जिला परिषद सदस्य पहुंचे थे
जुलाई 2024 में प्रमुख शोभा देवी, तत्कालीन बीडीओ अमित कुमार झा, पाटन पश्चिमी के जिप सदस्य जयशंकर सिंह स्थल पर पहुंचकर जायजा लिया था. इस दौरान जलजमाव का कारण पानी निकास के मार्ग को अवरुद्ध बताया गया था. साथ ही संबंधित व्यक्ति द्वारा पानी निकास को खुलवाया गया था. तब यह कहा गया था कि चार माह बरसात के बाद इस समस्या का समाधान निकाला जायेगा. लेकिन आश्वासन के दो वर्ष से अधिक गुजर जाने के बावजूद भी समस्या यथावत बनी हुई है. उक्त दिशा में कोई ठोस पहल नहीं किया जा सका है.
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क्या है समस्या?
पहले गांवों की जनसंख्या कम थी. इसलिए पानी कहीं से भी निकल जाता था. लेकिन गांवों की जनसंख्या बढ़ी, सड़क किनारे घर बन गए. जिसके कारण पानी का निकास अवरुद्ध हो गया.
क्या है स्थाई निदान?
बरसात या घर का पानी निकले. किसी को भी परेशानी नहीं हो. इसके लिए नाली का निर्माण कराना होगा. लेकिन इसके लिए बड़ी राशि की आवश्यकता होगी. बताया जाता है कि इसका प्राक्कलन तैयार किया गया है. नाली निर्माण के लिए करीब 30 लाख रुपये लगेंगे. जो पंचायत से खर्च कर पाना संभव नहीं है. जबकि ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधि के पास इच्छाशक्ति की कमी है. पंचायत प्रतिनिधि के पास इच्छाशक्ति होती, समस्या का समाधान करना चाहते, तो प्रमुख, जिला परिषद सदस्य और मुखिया मिलकर 15वें वित की राशि से नाली का निर्माण कराया जा सकता था. लेकिन उन लोगों द्वारा ऐसा करने के बजाए कई ऐसे योजनाओं का निर्माण कराया गया है, जिसका कोई उपयोग नहीं है.
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