Palamu news:त्रिमुला कंपनी को जमीन नहीं देने पर अड़े मेराल के ग्रामीण, जनसभा में कहा- जान देंगे, जमीन नहीं देंगे
जनसभा में महिलाएं | Prabhat Khabar Network
झारखंड के मेराल में ग्रामीणों ने त्रिमुला कंपनी को जमीन देने से साफ इनकार कर दिया है। किसानों ने अपनी आजीविका बचाने के लिए संघर्ष का संकल्प लिया है।
पाटन,पलामू: प्रखंड के मेराल स्थित मध्य विद्यालय परिसर में बुधवार को सात सूत्री मांगों को लेकर ग्रामीणों की जनसभा हुई. अवधेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित सभा का संचालन विकास कुमार मेहता और मोला सिंह चेरो ने संयुक्त रूप से किया. सभा में ग्रामीणों ने त्रिमुला कंपनी को जमीन नहीं देने का निर्णय लिया. ग्रामीणों ने कहा कि जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे. जल, जंगल और जमीन को लूटने नहीं देने का भी संकल्प लिया.
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इस दौरान ग्रामीणों ने "त्रिमुला कंपनी वापस जाओ", "जो हमसे टकरायेगा, वह चूर-चूर हो जायेगा" और "आदिवासी की जमीन हड़पना बंद करो" के नारे लगाये. ग्रामीणों ने कंपनी की प्रस्तावित परियोजना का विरोध करते हुए एकजुट होकर संघर्ष करने की बात कही.
कोयला खनन का ग्रामीण कर रहे विरोध
ग्रामीणों के अनुसार त्रिमुला कंपनी को मेराल कोल ब्लॉक में कोयला खनन के लिए जमीन की जरूरत है. इसी जमीन को लेकर ग्रामीण विरोध कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि मेराल कृषि प्रधान क्षेत्र है. यहां के अधिकांश लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है. जमीन चली गयी, तो किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो जायेगा.
ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सब्जी का उत्पादन होता है. मेदिनीनगर बाजार में पहुंचने वाली 50 प्रतिशत से अधिक सब्जियां मेराल क्षेत्र से जाने का दावा ग्रामीणों ने किया. किसान सुबह खेत से सब्जियां लेकर मेदिनीनगर बाजार जाते हैं और बिक्री के बाद शाम तक वापस लौट आते हैं.
तीन तरफ नदियों से घिरा है क्षेत्र
ग्रामीणों ने कहा कि मेराल तीन तरफ से नदियों से घिरा है. दक्षिण में अमानत नदी तथा पश्चिम और उत्तर में जिंजोई नदी बहती है. क्षेत्र में करीब 30 से 35 फीट की गहराई पर पर्याप्त पानी उपलब्ध है. इससे खेती में सुविधा होती है. ग्रामीणों ने क्षेत्र में करीब 360 देवी-देवताओं के स्थान होने की भी बात कही.
पूर्व मुखिया ने कहा, जमीन नहीं देंगे
मेराल की पूर्व मुखिया अनीता देवी ने कहा कि ग्रामीण किसी भी तरह कमजोर नहीं हैं. कंपनी या सरकार से संघर्ष के लिए ग्रामीणों ने पारंपरिक हथियार तैयार रखे हैं. उन्होंने कहा कि विस्थापन से समाज टूटता है और लोग बिखर जाते हैं. ग्रामीण जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे.
ग्रामीणों ने खनन से जुड़े नियमों का भी हवाला दिया. उनका कहना था कि नगर निगम के नजदीक खनन नहीं किया जाना चाहिए. मेराल जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर है. ग्रामीणों के अनुसार यहां से मेदिनीनगर पहुंचने में 15 से 20 मिनट लगते हैं.
संघर्ष के साथ जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर सवाल
आजाद समाज पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अजय सिंह चेरो ने कहा कि ग्रामीणों ने अपने हक और अधिकार के लिए लड़ाई शुरू की है. उन्होंने त्रिमुला कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों के संघर्ष के बीच जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों के जनसभा में नहीं पहुंचने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
उन्होंने कहा कि संघर्ष हताश या निराश हो सकता है, लेकिन परास्त नहीं हो सकता. मंडल डैम के विस्थापितों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विस्थापित आज भी परेशान हैं.
जनसभा में मुखिया छोटू सिंह, पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी वीरेंद्र पासवान, पूर्व मुखिया सुनीता देवी, रोहित कुमार सिंह, महेंद्र सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.
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