पलामू : भीतिहा स्कूल में बदहाली का आलम, जर्जर स्कूल भवन में 100 बच्चों की 2 शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई

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भीतिहा स्कूल में बदहाली की तस्वीर / Prabhat Khabar Network

पलामू के भीतिहा गांव में उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय की बदहाली बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है. जर्जर भवन, सीमित कमरे और केवल दो शिक्षक 100 बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल रहे हैं. अभिभावक चिंतित हैं और नए भवन की मांग कर रहे हैं.

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कृष्ण गुप्ता की रिपोर्ट

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पलामू. जिले के पीपरा प्रखंड के भीतिहा गांव स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले करीब 100 बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो गया है. जर्जर भवन, सीमित कमरों और शिक्षकों की कमी के बीच कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की पढ़ाई हो रही है. विद्यालय की बदहाल स्थिति के कारण अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर चिंतित हैं.

छत और दीवारों से उखड़ रहा प्लास्टर

विद्यालय भवन की छत और दीवारों का प्लास्टर जगह-जगह उखड़ चुका है. कई हिस्सों में भवन की स्थिति इतनी खराब है कि कभी भी प्लास्टर का हिस्सा गिरने से दुर्घटना हो सकती है. बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण कमरों में बैठकर पढ़ना भी मुश्किल हो जाता है. जर्जर सीलिंग से पहले भी प्लास्टर गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं.

विद्यालय भवन की छत और दीवारों का प्लास्टर जगह-जगह उखाड़ा /Prabhat Khabar Network
विद्यालय भवन की छत और दीवारों का प्लास्टर जगह-जगह उखाड़ा /Prabhat Khabar Network

तीन कमरों में 100 बच्चों की पढ़ाई

विद्यालय में करीब 100 बच्चे नामांकित हैं, जबकि पढ़ाई के लिए पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं हैं. तीन कमरों में बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता है. इससे कक्षाओं के संचालन में परेशानी होती है. बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है. कई बार बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है.

महज दो शिक्षकों के भरोसे पांच कक्षाएं

विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई के लिए महज दो शिक्षक कार्यरत हैं. बच्चों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की कमी के कारण पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है. एक साथ कई कक्षाओं को संभालना शिक्षकों के लिए भी चुनौती बना हुआ है.

बदहाल शौचालय और जर्जर रसोईघर

विद्यालय में शौचालय की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है. वहीं रसोईघर जर्जर होने के कारण मध्याह्न भोजन तैयार करने में परेशानी होती है. रसोई की बदहाल स्थिति के चलते विद्यालय के एक कमरे में ही मध्याह्न भोजन तैयार करना पड़ता है. इससे बच्चों की पढ़ाई के लिए उपलब्ध स्थान और कम हो जाता है.

चारदीवारी नहीं होने से सुरक्षा की चिंता

विद्यालय परिसर में चारदीवारी का भी अभाव है. इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है. विद्यालय के आसपास से लोगों और वाहनों की आवाजाही के कारण छोटे बच्चों को संभालना शिक्षकों के लिए मुश्किल होता है. अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाना जरूरी है.

विभाग को कई बार भेजा गया पत्र

प्रधानाध्यापक अमरेश कुमार सिंह ने बताया कि भवन की मरम्मत, आवश्यक सुविधाओं और अन्य समस्याओं को लेकर विभाग को कई बार पत्र भेजा गया है. इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है. उन्होंने कहा कि जर्जर भवन में बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर हर समय चिंता बनी रहती है.

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अभिभावकों ने नये भवन की मांग की

ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि भवन की स्थिति अब केवल मरम्मत से सुधारने वाली नहीं रह गयी है. बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए नये भवन का निर्माण कराया जाना चाहिए. साथ ही पर्याप्त शिक्षक, बेहतर शौचालय, सुरक्षित रसोईघर और चारदीवारी की व्यवस्था भी जरूरी है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मामले में शीघ्र पहल कर विद्यालय की समस्याओं का स्थायी समाधान कराने की मांग की है.


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