मेदिनीनगर : ध्वजारोहाण के साथ जैन समाज का 10 दिवसीय पर्यूषण महापर्व शुरू

Updated:
विज्ञापन

पूजा में सक्रिय जैन श्रद्धालू | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

मेदिनीनगर में जैन धर्मावलम्बियों के 10 दिवसीय पर्वाधीराज पर्यूषण महापर्व का शुभारंभ हुआ. यह पवित्र पर्व आत्मा की शुद्धि, संयम और आत्मकल्याण के लिए मनाया जाता है.

विज्ञापन

मेदिनीनगर. जैन धर्मावलम्बियों का 10 दिवसीय पर्वाधीराज पर्यूषण महापर्व शुरू हुआ.राजस्थान के सांगानेर स्थित श्रमण संस्कृति संस्थान से पधारे विद्वान पंडित आदिश जैन शास्त्री जी के देखरेख में यह महापर्व भक्ति के वातावरण में मनाया जायेगा. बताया गया कि भादो माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी से पर्यूषण पर्व शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी तक मनाया जाता है. बुधवार को शहर के बाजार स्थित जैन मंदिर में सुबह में विधि विधान से पूजा अनुष्ठान किया गया.

विज्ञापन

जैन समाज के ध्वजारोहण के साथ 10 दिवसीय महापर्व शुरू हुआ. पर्व के दौरान जैन श्रद्धालु 10 दिनों तक उपवास, व्रत, पूजा अर्चना, स्वाध्याय करेंगे और प्रवचन का लाभ लेंगे. यह जैन समाज का पवित्र और आध्यात्मिक महापर्व है. यह महापर्व मुख्य रूप से आत्मा की शुद्धि, संयम और आत्मकल्याण के लिए मनाया जाता है. जैन समाज के अशोक कुमार जी पांड्या, जम्बू जी गंगवाल व अरुण जी गंगवाल ने सामूहिक रूप से ध्वजारोहण किया. पूजा विधान से पूर्व भगवान श्रीजी को विराजमान किया गया.

धर्मचंद जी, पंकज कुमार जी पाटनी परिवार के द्वारा भगवान श्रीजी को विराजमान कर प्रथम अभिषेक किया गया. इसके बाद अशोक जी पांड्या व उनके परिवार के सदस्यों को शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. विद्वान पंडित आदिश जैन शास्त्री के सानिध्य में भक्तजनों ने श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा अनुष्ठान किया.

तत्वार्थ सूत्र के पाठ के बाद शाम में आरती, प्रवचन के बाद जैन महिला मंडल के सदस्यों के द्वारा भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया. विद्वान पंडित आदिश जैन शास्त्री ने प्रवचन के दौरान बताया कि जैन धर्म प्राणियों के प्रति पूर्ण अहिंसा और आत्म शुद्धता का मार्ग प्रशस्त करता है. जैन धर्म अहिंसा, विचारों की उदारता और अपरिग्रह के सिद्धांत पर आधारित है. उन्होंने दस लक्षण धर्म के बारे में विस्तार से बताया.

कहा कि महापर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म मनाया जाता है.उत्तम क्षमा केवल दूसरों को माफ करने का नाम नहीं है, बल्कि अपने मन से क्रोध, द्वेष और बैर की भावना को दूर करना सिखाता है. क्रोध का पूर्ण त्याग कर क्षमा भाव अपनाना आत्मा का सर्वोत्तम गुण है. यह धर्म सभी जीवों के प्रति क्षमा व मैत्री का भाव रखने की शिक्षा देता है. यह धर्म प्रतिशोध या बैर भाव,अहंकार मिटाकर जीवन में शांति और सद्भाव का मार्ग प्रशस्त करता है.

उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति हमारे प्रति कुछ गलत करता है, तब क्रोध करना आसान है. लेकिन शांत रहकर उसे क्षमा कर देना और मन में किसी के प्रति बैर का भाव नहीं रखना ही उत्तम क्षमा है. इस धर्म का पालन सबको करना चाहिये. मौके पर जैन समाज के अध्यक्ष सरस जैन, सचिव सागर जैन, सुरेश जैन, विमल रारा, सुभाषचंद्र जैन सरावगी, कमल काशलीवाल, सोनू वाकलीवाल,मनोज पहाड़िया, रोहित जैन, पुष्पा रारा,बबीता काला सहित महिला मंडल,जैन समाज व जिनेंद्र भक्त मण्डल के लोग काफी संख्या में मौजूद थे.

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola