बकोरिया कांड : 12 में से तीन लोगों के हाथ पर ही पाये गये थे बारूद के अंश

Updated at : 24 Oct 2018 6:15 AM (IST)
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बकोरिया कांड : 12 में से तीन लोगों के हाथ पर ही पाये गये थे बारूद के अंश

रांची/पलामू : आठ जून 2015 को पलामू के सतबरवा ओपी क्षेत्र के बकोरिया में हुए कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के मामले में सीआइडी ने अंतिम जांच प्रतिवेदन पलामू कोर्ट में सौंपा है. इसमें कहा गया है कि मुठभेड़ में मारे गये सभी 12 लोग उग्रवादी थे. दंडाधिकारी की मौजूदगी में मृत उग्रवादियों का नाइट्रिक एसिड से […]

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रांची/पलामू : आठ जून 2015 को पलामू के सतबरवा ओपी क्षेत्र के बकोरिया में हुए कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के मामले में सीआइडी ने अंतिम जांच प्रतिवेदन पलामू कोर्ट में सौंपा है. इसमें कहा गया है कि मुठभेड़ में मारे गये सभी 12 लोग उग्रवादी थे. दंडाधिकारी की मौजूदगी में मृत उग्रवादियों का नाइट्रिक एसिड से हाथ धोवन का नमूना लेकर इसकी फोरेंसिक जांच राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला में करायी गयी. इसमें तीन उग्रवादियों के हाथ में बारूद के अंश पाये गये थे, जबकि अन्य का हाथ धोवन के कलेक्शन को सही तरीके से नहीं होना बताया गया.
रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि घटना में मारे गये उदय यादव, योगेश यादव, एजाज अहमद, अमलेश यादव, देवराज उर्फ अनुराग, संतोष यादव, नीरज यादव, बुधम उरांव, महेंद्र सिंह, सत्येंद्र परहिया , प्रदीप तिर्की और उमेश सिंह उर्फ उमेश खरवार के खिलाफ आर्म्स एक्ट व विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के अंतर्गत सत्य पाया गया है. वरीय पदाधिकारियों ने भी अपने अंतिम आदेश में भादवि की धारा 147/148/149/353/307 व 25(1-ए)/25(1-बी)ए/26(1)(2)/27(1)(2)/ 35 सशस्त्र अधिनियम के अलावा 17 सीएलए एक्ट और 4/5 विस्फोटक अधिनियम के अंतर्गत उक्त 12 मृत उग्रवादियों के विरुद्ध अंतिम प्रतिवेदन (अभियुक्त मृत दिखाते हुए) समर्पित करने का आदेश दिया है. बता दें कि डीजीपी डीके पांडेय के आदेश के बाद सीआइडी ने अंतिम प्रतिवेदन कोर्ट को सुपुर्द किया है. सीआइडी ने दावा किया है कि सभी मृत उग्रवादियों का आपराधिक इतिहास प्राप्त किया गया है.
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य, जो अंतिम प्रतिवेदन में बताये गये
-पलामू के तत्कालीन सार्जेंट मेजर व राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला की जांच में मृतक उग्रवादियों के पास से बरामद हथियार कारगर पाये गये. सभी हथियारों से फायरिंग करने की बात कही गयी है.
-घटनास्थल से बरामद गोली व खोखा की जांच राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला से करायी गयी. इसमें मिले खाेखे को उग्रवादियों के हथियार से चलना बताया गया. कारतूस भी उग्रवादियों के पास से बरामद हथियार के ही पाये गये.
-बरामद बम को डिफ्यूज करने के बाद उसके अवशेषों की जांच राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला से करायी गयी. इसमें पता चला कि बम शक्तिशाली का था.
-उग्रवादियों के स्कॉर्पियो से बरामद तौलिये पर लगा खून भी जांच में मानव का पाया गया.
-जांच में उग्रवादियों की स्कॉर्पियो (डब्ल्यूबी-60इ-2011) की फोरेंसिक जांच करायी गयी. इस पर 7.62 एमएम, 5.56 एमएम और 0.303 कैलिबर राइफल की गोली लगने की बात कही गयी. गोलियां बाहर और अंदर दोनों ओर से लगी थी.
-पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी 12 लोगों की मौत फायर आर्म्स की गोली लगने से होना बताया गया है.
-घटना के वक्त एक अन्य वाहन (सफेद रंग की स्कॉर्पियो) से भागे अज्ञात उग्रवादियों के बारे में पता नहीं लगाया जा सका.
मुठभेड़ स्थल से बरामद सामान
  • -मैगजीन समेत 0.303 की चार राइफल
  • -188 चक्र कारतूस
  • -19 चक्र खोखा
  • -सिल्वर कलर की स्कॉर्पियो (डब्ल्यूबी-60इ-2011)
  • -11 पीठू
  • -खून लगा तौलिया एक
  • -काले रंग का एक नया वाॅकी-टॉकी
  • -वाकी-टॉकी की टूटी हुई सर्किट
  • -नौ वोल्ट की 23 पीस बैटरी
  • -योगेश कुमार यादव के नाम पर बना वेब टेक्नोलॉजी का एडमिट कार्ड
  • -एजाज अहमद का ड्राइविंग लाइसेंस
  • -एके-47 का 177 चक्र खाली खोखा
  • नौ लोगों के हाथ के धोवन का कलेक्शन सही तरीके से नहीं लिया गया
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