सात दशक से कायम है बाबा भूतेश्वर नाथ की अनूठी पूजा परंपरा

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मंगलापाड़ा गांव स्थित प्राचीन बाबा भूतेश्वर नाथ मंदिर में सावन माह के दौरान किया गया आकर्षक शृंगार. | Prabhat Khabar Network

पाकुड़ के मंगलापाड़ा में 70 साल से सावन में रुद्राभिषेक व शृंगार की परंपरा. 14 से 25 अगस्त तक भव्य आयोजन. आस्था का अनूठा संगम.

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पाकुड़ से रमेश भगत की रिपोर्ट.

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पाकुड़ : पाकुड़ प्रखंड के मंगलापाड़ा गांव में बाबा भूतेश्वर नाथ महादेव की सावन माह में रुद्राभिषेक और शृंगार की करीब सात दशक पुरानी परंपरा आज भी पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ कायम है. वर्ष 1957 में शुरू हुई यह परंपरा समय के साथ और भव्य होती गयी है. इस वर्ष 14 अगस्त से 13 दिवसीय रुद्राभिषेक सह शृंगार का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी पूर्णाहुति 25 अगस्त को होगी.


मंगलापाड़ा गांव स्थित प्राचीन बाबा भूतेश्वर नाथ मंदिर में सावन माह के दौरान किया गया आकर्षक शृंगार. | Prabhat Khabar Network
मंगलापाड़ा गांव स्थित प्राचीन बाबा भूतेश्वर नाथ मंदिर में सावन माह के दौरान किया गया आकर्षक शृंगार. | Prabhat Khabar Network

1957 में शुरू हुआ था रुद्राभिषेक

मंगलापाड़ा गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर के शिवलिंग को बाबा भूतेश्वर नाथ के नाम से जाना जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1957 में गांव निवासी भागवत प्रसाद भगत और उनके तीन पुत्र गणेश प्रसाद भगत, भोला प्रसाद भगत तथा रामजी प्रसाद भगत ने सावन माह में बाबा भूतेश्वर नाथ के रुद्राभिषेक की शुरुआत की थी. शुरुआती दौर में भगवान शिव की पूजा और अभिषेक तक ही आयोजन सीमित था, लेकिन समय के साथ इसका स्वरूप लगातार विस्तृत होता गया.

विजय कुमार भगत ने दिया भव्य स्वरूप

1990 के दशक में स्वर्गीय विजय कुमार भगत ने बाबा भूतेश्वर नाथ की पूजा को और भव्य स्वरूप प्रदान किया. वे सावन माह में सपत्नीक मंगलापाड़ा में रहकर गुरुधाम के 11 प्रकांड पंडितों के माध्यम से प्रतिदिन रुद्राभिषेक और बाबा का शृंगार करवाते थे. इसी दौर से मंदिर में प्रतिदिन शृंगार की परंपरा शुरू हुई. धीरे-धीरे इस पूजा की चर्चा मंगलापाड़ा गांव से निकलकर आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने लगी.

फलों के रस से लेकर दूध-दही तक से होता है अभिषेक

बाबा भूतेश्वर नाथ के रुद्राभिषेक में गंगाजल, विभिन्न फलों के रस, ईख, बेदाना, मौसमी, संतरा, तरबूज, चंदन, अबीर, बेलपत्र, घी, गुलाबजल, दही, दूध और गुड़ सहित विभिन्न पूजन सामग्रियों का उपयोग किया जाता है. सावन माह में प्रतिदिन शाम को बाबा का आकर्षक शृंगार किया जाता है. फूलों और वस्त्रों से बाबा को मनमोहक स्वरूप दिया जाता है. इसके साथ ही छप्पन भोग भी अर्पित किया जाता है. शाम के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं.

25 अगस्त को हवन और भंडारे के साथ होगी पूर्णाहुति

13 दिवसीय आयोजन की पूर्णाहुति 25 अगस्त को धूमधाम से होगी. इस अवसर पर हवन, विशेष पूजन और भंडारे का आयोजन किया जायेगा. समापन समारोह में मंगलापाड़ा सहित पाकुड़ और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है.

महिलाएं भी निभा रहीं सक्रिय भूमिका

पूर्वजों की इस परंपरा को आगे बढ़ाने में श्याम सुंदर भगत, जगदीश भगत, पवन भगत, तारकेश्वर भगत, कैलाश भगत, किशन कुमार, लोकनाथ भगत, राहुल भगत, गौरव प्रकाश, रिशु भगत, प्रीतम भगत, सौरभ प्रकाश, अभिषेक भगत, आदित्य भगत, शुभ आर्यन, निखिल भगत, आयुष भगत, सुमित आर्यन, अक्षय भगत, नैतिक भगत और केतन भगत सहित भगत परिवार के अन्य सदस्य जुटे हुए हैं. परिवार की महिलाएं भी आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं. पूरे पूजा अनुष्ठान को पंडित ओंकारनाथ मिश्रा और प्रभाकर मिश्रा द्वारा संपन्न कराया जा रहा है.

आस्था की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प

आयोजकों का कहना है कि पूर्वजों की आस्था और बाबा भूतेश्वर नाथ के प्रति श्रद्धा ने इस परंपरा को करीब 70 वर्षों से जीवंत रखा है. पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार के सदस्य इस आयोजन से जुड़ते रहे हैं. यही वजह है कि बदलते समय के बावजूद मंगलापाड़ा में सावन के दौरान बाबा भूतेश्वर नाथ का रुद्राभिषेक और शृंगार आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.




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