बलात्कार व हत्या मामले में अभियुक्त को आजीवन कारावास

Updated at : 26 Jan 2016 7:22 AM (IST)
विज्ञापन
बलात्कार व हत्या मामले में अभियुक्त को आजीवन कारावास

पाकुड़ : पाकुड़ जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश श्रीवास्तव की न्यायालय ने सोमवार को बलात्कार एवं हत्या के एक मामले में हिरणपुर थानांतर्गत बागशीशा निवासी शिवधन सोरेन, पिता स्व सफा सोरेन को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास के साथ-साथ अर्थदंड की सजा सुनाई. सूचक बड़की हांसदा के लिखित बयान पर हिरणपुर थाना कांड […]

विज्ञापन
पाकुड़ : पाकुड़ जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश श्रीवास्तव की न्यायालय ने सोमवार को बलात्कार एवं हत्या के एक मामले में हिरणपुर थानांतर्गत बागशीशा निवासी शिवधन सोरेन, पिता स्व सफा सोरेन को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास के साथ-साथ अर्थदंड की सजा सुनाई. सूचक बड़की हांसदा के लिखित बयान पर हिरणपुर थाना कांड संख्या 20/12 अंकित किया गया.
पति की अनुपस्थिति में घटना : इसमें शिक्षिका ने अभियुक्त शिवधन सोरेन व उसके भाई होपना सोरेन के विरुद्ध आरोप लगाया था कि जब उसका पति काम करने के लिए वर्द्धमान गया था और वह घर में अकेली थी. दिनांक 05 फरवरी 2012 को संध्या 07 बजे दोनों घर में घुस कर उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश की.
जिसमें शिवधन सोरेन ने उसके साथ बलात्कार किया और होपना सोरेन ने उसमें सहयोग किया था. विरोध करने पर मारपीट कर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया गया था. सूचिका ने अपने पति के साथ थाना जा कर रिपोर्ट दर्ज करायी. बाद में सूचिका की मृत्यु जख्म के कारण हुई और अन्वेषण पदाधिकारी ने अभियुक्त के खिलाफ धारा 452, 341, 323, 376, 302/34 के तहत चार्जशीट न्यायालय में दाखिल किया.
जिस पर अभियुक्त शिवधन सोरेन का विचारण हुआ. जबकि होपना सोरेन फरार था. जिसका अलग से विचारण चल रहा है. कुल गवाहों ने अभियोजन के केस को समर्थन किया. सबसे मुख्य बात यह है कि इस मामले में तीन चिकित्सक नवीना बारला, डॉ संजय कुमार झा, डॉ सतीश चंद्र सिंह द्वारा जख्म प्रतिवेदन तैयार हुआ था. लेकिन प्रतिपक्ष की ओर से एक गवाह जो सूचिका के भाई छोटका हांसदा ने अपने गवाही में अलग तथ्य का उजागर किया जो विश्वसनीय नहीं था. क्योंकि वह अभियुक्त को बचाने के लिए सूचिका के पति को ही दोषी करार दे रहा था.
लेकिन उसने इसके लिए कहीं भी रिपोर्ट दर्ज नहीं करायी थी. न्यायालय ने अभियुक्त को धारा 376 के तहत 10 वर्ष और धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और अर्थदंड के रूप में 50 हजार रूपया लगाया. अर्थदंड के रूप में दो वर्ष अतिरिक्त कारावास की सजा सुनायी. साथ ही यह भी निर्णय दिया गया कि अभियुक्त से वसूली गयी, अर्थदंड की राशि मृतका के निकटतम संबंधी को दी जाय.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola