रांची समेत 18 जिलों के पानी में नाइट्रेट की मात्रा अधिक, बच्चों के लिए हो सकता है खतरनाक

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नाइट्रेट की अधिक मात्रा से बच्चों की सेहत पर पड़ सकता है असर

केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के 18 जिलों में भूजल में नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है. यह विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह ब्लू बेबी सिंड्रोम जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. रिपोर्ट में इसके कारणों और संभावित समाधानों पर भी प्रकाश डाला गया है.

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मनोज सिंह की रिपोर्ट

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Jharkhand Water Quality: झारखंड में भूजल की स्थिति को लेकर केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट में चिंता जताई गई है. फरवरी 2026 में जारी डायनेमिक ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज, ग्राउंड वाटर लेवल एंड ग्राउंड वाटर क्वालिटी ऑफ झारखंड-2025 रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 18 जिलों के पानी में नाइट्रेट की मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई है.

केंद्रीय भूजल बोर्ड ने राज्य में पानी के 381 नमूनों की जांच की थी. इनमें 66 नमूनों यानी 17.32 फीसदी में नाइट्रेट की मात्रा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर की निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई. पानी में नाइट्रेट की बढ़ी हुई मात्रा चिंता का विषय है, क्योंकि नाइट्रेट शरीर में नाइट्राइट में बदल सकता है.

बच्चों के लिए ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है नाइट्रेट

पानी में नाइट्रेट की अधिक मात्रा शरीर की रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है. छोटे बच्चों में इससे मेथेमोग्लोबिनेमिया यानी ब्लू बेबी सिंड्रोम हो सकता है. लंबे समय तक अधिक नाइट्रेट वाले पानी का सेवन गर्भावस्था के दौरान भी नुकसानदायक हो सकता है. बहुत अधिक नाइट्रेट वाले पानी का लगातार सेवन थायरॉयड को बढ़ा सकता है. इससे पहले राज्य में कई जगह पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा का मामला भी सामने आया था. सरकार ने नाइट्रेट की समस्या को दूर करने के उपायों पर काम शुरू कर दिया है. इस संबंध में विशेषज्ञ संस्थानों से पत्राचार कर जानकारी ली जा रही है कि इसे किस तरह दूर किया जा सकता है. विभाग ने इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने की बात कही है.

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इन 18 जिलों में पानी में नाइट्रेट अधिक

रांची, बोकारो, देवघर, धनबाद, दुमका, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, गुमला, हजारीबाग, जामताड़ा, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, पलामू, साहिबगंज और सिमडेगा में नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पायी गयी है.

आंकड़े महत्वपूर्ण

नमूने : केंद्रीय भूजल बोर्ड ने कुल 381 नमूनों जांच की.

381 में से 66 नमूनों में नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित सीमा से 17.32% अधिक पायी गई.

मिलीग्राम/लीटर : पानी में नाइट्रेट की निर्धारित सीमा 45 है.

एक साल में भूजल दोहन के स्तर में 1.46% वृद्धि हुई.

राज्य में 32.89 फीसदी भूजल का हो रहा दोहन

केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में भूजल दोहन का स्तर 32.89 फीसदी तक पहुंच गया है. यानी राज्य में जितना संभावित भूजल उपलब्ध है, उसका 32.89 फीसदी दोहन किया जा रहा है. वर्ष 2024 में भूजल दोहन का स्तर 31.43 फीसदी था. इस तरह एक साल में भूजल दोहन के स्तर में करीब 1.46 फीसदी की वृद्धि हुई है. विशेषज्ञों के अनुसार भूजल का दोहन 70 फीसदी से अधिक होने पर स्थिति गंभीर हो जाती है. रिपोर्ट में झारखंड में भूजल की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है.

नाइट्रेट बढ़ने से पानी ही नहीं, जलीय जीवों पर भी खतरा

सस्टेनेबल भारत फाउंडेशन के निदेशक डॉ मनीष कुमार ने बताया कि झारखंड में मुख्य रूप से सीवरेज और सेप्टिक के अव्यवस्थित डिस्पोजल के कारण पानी दूषित हो रहा है. खेतों में जिस रसायनिक खाद का प्रयोग होता है, उसमें नाट्रोजन अधिक होता है. वह धीरे-धीरे पानी में नीचे चला जाता है. इससे पानी दूषित हो जाता है. कुछ योगदान औद्योगिक स्तर पर भी होता है. नाइट्रोजन अधिक होने से पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. इस कारण जलाशयों में दूषित पदार्थ जाने से ऑक्सीजन कम हो जाती है. इससे वहां के जीव-जंतु खतरे में पड़ जाते हैं.

इन कारणों से पानी में बढ़ सकता है नाइट्रेट

पानी में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं. इनमें खेतों में नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों का अत्यधिक इस्तेमाल, सेप्टिक टैंक और सीवेज का भूजल में रिसाव, खुले में पड़े कचरे और जैविक पदार्थों का सड़ना, अत्यधिक भूजल दोहन के कारण प्रदूषित पानी का भूजल तक पहुंचना और औद्योगिक प्रदूषण शामिल हैं.

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जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज बढ़ाने की सिफारिश

केंद्रीय भूजल बोर्ड ने राज्य में जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज संरचनाओं की संख्या बढ़ाने की सिफारिश की है. विशेष रूप से कठोर चट्टानी क्षेत्रों में वर्षा जल को रोकने और भूजल रिचार्ज करने के लिए अधिक संरचनाओं के निर्माण पर जोर दिया गया है. इसके अलावा पुराने तालाबों के पुनरुद्धार, पहाड़ी क्षेत्रों में झरनों और उनके कैचमेंट के विकास तथा कृत्रिम भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है. भूजल निकासी को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत भी बताई गई है.

घरेलू स्तर पर कैसे कम कर सकते हैं नाइट्रेट का असर

पानी में नाइट्रेट को व्यापक रूप से दूर करने की प्रक्रिया थोड़ी जटिल होती है. इसके लिए बायो-डिनाइट्रेफिकेशन, इलेक्ट्रोसिस, आयन एक्सचेंज और रिवर्स ओस्मोसिस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. घरेलू स्तर पर पानी को उबालकर पीने से नाइट्रेट का असर पूरी तरह खत्म नहीं होता, लेकिन इससे काफी हद तक असर कम किया जा सकता है. वहीं कुछ आरओ सिस्टम में रिवर्स ओस्मोसिस की सुविधा होती है, जिसका उपयोग नाइट्रेट युक्त पानी को काफी हद तक शुद्ध करने में किया जा सकता है.


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