पहले नई सड़क पर लाखों खर्च, फिर पाइपलाइन के लिए खोद डाली! लोहरदगा में विकास का ये कैसा खेल?

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जलार्पूति पाइप लाइन के लिए तोडी गई पीसीसी सड़क | Prabhat Khabar Network

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लोहरदगा में विकास कार्यों में तालमेल की कमी से जनता परेशान. नई पीसीसी सड़क को पाइपलाइन के लिए तोड़े जाने पर उठे सवाल, सरकारी पैसे की बर्बादी का आरोप.

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लोहरदगा: शहर में विकास योजनाओं के नाम पर सरकारी राशि खर्च हो रही है, लेकिन योजनाओं के बीच समन्वय का अभाव अब सवाल खड़े करने लगा है. स्थिति यह है कि एक तरफ पीसीसी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, तो दूसरी तरफ उसी सड़क को शहरी जलापूर्ति योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदा जा रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर यह कैसा विकास है, जिसमें एक काम पूरा होने के कुछ ही दिनों बाद दूसरे काम के लिए उसे फिर से क्षतिग्रस्त कर दिया जाता है.

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ताजा मामला शहर के रघुनंदन लेन स्थित तालाब के पीछे का है. यहां हाल के दिनों में पीसीसी सड़क का निर्माण कराया गया था. सड़क बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब आवागमन की समस्या दूर होगी, लेकिन शहरी जलापूर्ति योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के लिए नई बनी सड़क की खुदाई शुरू कर दी गई. सड़क टूटने से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है. साथ ही विकास कार्यों की गुणवत्ता और योजनाओं की प्लानिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. शहरवासियों का आरोप है कि नई जलापूर्ति योजना के काम में गुणवत्ता का भी अभाव है और अधिकांश काम पेटीदारी में कराया जा रहा है.

प्लानिंग पहले होती तो सड़क नहीं टूटती

शहर में शहरी जलापूर्ति योजना कोई अचानक शुरू हुई योजना नहीं है. ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब पाइपलाइन बिछाने का काम प्रस्तावित था, तो उससे पहले संबंधित गलियों में पीसीसी सड़क का निर्माण कैसे करा दिया गया. यदि नगर परिषद और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय होता, तो सड़क निर्माण से पहले पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा किया जा सकता था. इससे नई बनी सड़क को दोबारा तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती.

एक ही स्थान पर पहले सड़क निर्माण और फिर उसकी खुदाई होने से सरकारी राशि के दोहरे इस्तेमाल की स्थिति बनती है. सड़क निर्माण में खर्च होने वाली राशि जनता के टैक्स से आती है. ऐसे में नई सड़क को कुछ ही समय बाद तोड़ना सरकारी राशि के बेहतर इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

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पैसे की बर्बादी या प्लानिंग का अभाव?

शहरवासियों का कहना है कि विकास कार्यों में प्राथमिकता और समन्वय के बिना योजनाओं को धरातल पर उतारने का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. सड़क, नाली, जलापूर्ति, बिजली और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों के लिए यदि साझा कार्ययोजना तैयार की जाए, तो बार-बार सड़क तोड़ने और बनाने की समस्या से बचा जा सकता है.

सवाल यह भी है कि सड़क निर्माण से पहले यह क्यों नहीं देखा गया कि इसी स्थान से जलापूर्ति की पाइपलाइन गुजरनी है? यदि इसकी जानकारी थी, तो सड़क क्यों बनाई गई और यदि जानकारी नहीं थी, तो विभागों के बीच समन्वय की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

शहर छोटा, लेकिन विकास कार्यों में उलझन बड़ी

लोहरदगा शहर क्षेत्रफल की दृष्टि से छोटा है. ऐसे में शहर की विकास योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय करना अपेक्षाकृत आसान होना चाहिए. बावजूद इसके बार-बार सड़क बनने और टूटने की स्थिति लोगों को परेशान कर रही है. लोगों का कहना है कि विकास का मतलब केवल निर्माण कार्य कराना नहीं है, बल्कि योजनाओं को इस तरह लागू करना भी है, जिससे सरकारी राशि की बचत हो और लोगों को लंबे समय तक बेहतर सुविधा मिल सके.

शहरवासियों ने नगर परिषद के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि शहरी जलापूर्ति योजना के साथ सड़क निर्माण सहित अन्य विकास योजनाओं का समन्वय सुनिश्चित किया जाए. साथ ही नई बनी सड़कों को बार-बार तोड़े जाने की स्थिति की समीक्षा कर जिम्मेदारी भी तय की जाए. जनता जानना चाहती है कि विकास योजनाओं की प्लानिंग में ऐसी चूक आखिर क्यों हो रही है और इसके लिए जवाबदेह कौन है.

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आजसू नेता बोले- जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे की लूट

आजसू के केंद्रीय सचिव सूरज अग्रवाल ने इस मामले में कहा कि यह जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे की लूट है. इसके लिए नगर परिषद के अधिकारी और यहां के जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं. उन्होंने शहरी जलापूर्ति योजना की जांच कराने और काम को पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की.

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