उपद्रवियों ने शहर को बनाया रणक्षेत्र, लाठी चार्ज

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उपद्रवियों से निपटनेे के लिए पुलिस को लाठी चार्ज भी करना पड़ा़ कई घरों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा. वहीं लोग चर्चा कर रहे थे कि लोहरदगा में बहुत शांति-अमन का माहौल था. लेकिन मुट्ठी भर लोगों ने यहां के अमन-चैन को नष्ट कर दिया. […]

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उपद्रवियों से निपटनेे के लिए पुलिस को लाठी चार्ज भी करना पड़ा़ कई घरों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा. वहीं लोग चर्चा कर रहे थे कि लोहरदगा में बहुत शांति-अमन का माहौल था. लेकिन मुट्ठी भर लोगों ने यहां के अमन-चैन को नष्ट कर दिया. भाई की तरह रहनेवाले लोग इस तरह की हरकत करेंगे, इसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी.

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लोहरदगा : विभिन्न संगठनों द्वारा सीएए के समर्थन में ललित नारायण स्टेडियम से एक विशाल रैली सुबह लगभग 11:30 बजे निकली जो 12:30 बजे बड़ी मस्जिद के पास पहुंची. यहां पर काफी शांतिपूर्ण तरीके से रैली गुजर रही थी. खुद डीसी आकांक्षा रंजन और एसपी प्रियदर्शी आलोक मौजूद थे. रैली में लगभग 15 हजार से ज्यादा महिला और पुरुष शामिल थे.
सभी लोग एनआरसी और सीएए के समर्थन में नारे लगाते जा रहे थे़ अमला टोली के पास जुलूस पर पथराव शुरू कर दिया गया. पथराव शुरू होते ही भगदड़ मच गयी. इसी बीच पेट्रोल बम भी फेंका जाने लगा. पेट्रोल बम के फटते ही आग लगनी शुरू हो गयी. जो जिधर भाग सका भागने लगा. जुलूस आगे बढ़ने के बजाय पीछे लौट गया़ सभी लोग अपनी जान बचाने के फिराक में लग गये.
लेकिन उपद्रवी मौका का फायदा उठाते हुए लगातार पेट्रोल बम फेंकते रहे. एक समुदाय विशेष के लोग कुछ घरों और दुकानों को चिह्नित कर उसमें आग लगा दिया. कई घरों में लोग अंदर थे और बाहर से आग लगा दिया गया. दूसरे लोगों ने किसी तरह आग लगाये गये घरों में फंसे लोगों को बाहर निकाला. किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा है. दर्जनों चार पहिया वाहन आग के हवाले कर दिये गये.
सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया. 100 से ज्यादा मोटरसाइकिल जला दिये गये. अफरा-तफरी का माहौल हो गया. पुलिस लगातार लोगों को समझा रही थी लेकिन लोग समझने को तैयार नहीं थे. रैली में शामिल लोग हतप्रभ थे.
उपद्रवियों से निपटनेे के लिए पुलिस को लाठी चार्ज भी करना पड़ा़ कई घरों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा. वहीं लोग चर्चा कर रहे थे कि लोहरदगा में बहुत शांति-अमन का माहौल था. लेकिन मुट्ठी भर लोगों ने यहां के अमन-चैन को नष्ट कर दिया. भाई की तरह रहनेवाले लोग इस तरह की हरकत करेंगे, इसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी.
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