बेतला में बंदरों का आतंक: 15 गांवों में दहशत, घरों में घुसकर उत्पात

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भ्रमण करता बंदर. | Prabhat Khabar Network

पलामू के बेतला सहित 15 गांवों में बंदरों का भारी आतंक, ग्रामीणों ने वन विभाग और डीसी से सुरक्षा की मांग की. बच्चों और राहगीरों में दहशत का माहौल.

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बेतला से संतोष कुमार की रिपोर्ट

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लातेहार. पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत बरवाडीह प्रखंड के बेतला और आसपास के करीब 15 गांवों में बंदरों का आतंक बढ़ गया है. बंदरों के हमले और उत्पात से परेशान ग्रामीणों ने अब प्रशासन और वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है. ग्रामीण डीएफओ और लातेहार उपायुक्त को आवेदन सौंपने की तैयारी में हैं.

बच्चों और राहगीरों में बढ़ी दहशत

ग्रामीणों के अनुसार, बंदरों के झुंड अकेले राहगीरों को घेरकर हमला कर रहे हैं. छोटे बच्चों के घर से बाहर निकलने को लेकर अभिभावक चिंतित हैं. स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी लोगों में डर बना हुआ है.

घरों में घुसकर मचा रहे उत्पात

बंदर घरों में घुसकर खाद्यान्न, फल, सब्जियां, कपड़े और अन्य सामान नष्ट कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि कई महिलाओं और बुजुर्गों समेत अन्य लोगों को बंदर काटकर घायल कर चुके हैं. लगातार बढ़ते उत्पात से लोगों को अपने ही घरों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

सूचना के बाद भी कार्रवाई नहीं

ग्रामीणों का आरोप है कि बंदरों के आतंक की जानकारी स्थानीय वन विभाग को कई बार दी गयी, लेकिन अब तक उन्हें पकड़ने या आबादी वाले क्षेत्रों से दूर करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया. इससे समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है. बेतला, कुटमू, पोखरी खुर्द, कोलपुरवा, अखरा, कुचला, मुरू और डोरामी समेत आसपास के कई गांव इस समस्या से प्रभावित बताए जा रहे हैं.

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मुआवजा नहीं मिलने से नाराजगी

ग्रामीणों का कहना है कि जंगली हाथियों समेत कुछ अन्य वन्यजीवों से होने वाले नुकसान पर मुआवजे का प्रावधान है, लेकिन बंदरों द्वारा फसल और घरेलू सामान को पहुंचाये गये नुकसान की भरपाई की व्यवस्था नहीं है. इससे आर्थिक नुकसान झेल रहे ग्रामीणों में नाराजगी है.

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कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने डीएफओ और उपायुक्त से प्रभावित गांवों का तत्काल निरीक्षण कराने और बंदरों को पकड़कर आबादी से दूर सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ने जैसी वैज्ञानिक व्यवस्था करने की मांग की है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो सभी प्रभावित गांवों के लोग एकजुट होकर आंदोलन करेंगे.

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