बेतला: मंडल डैम के फाटक में फंसा कचरा, बैकवाटर से 3 गांवों में घुसा बाढ़ का पानी - 36 परिवारों के डूबे घर

Updated:
विज्ञापन

बाढ़ के पानी से डूबा हुआ डूब क्षेत्र / Prabhat Khabar Network

मंडल डैम के फाटकों में मलबा फंसने से मूसलाधार बारिश के बाद भारी जलभराव हो गया है. कुटकू, भजना और खुरा गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से 36 परिवार बेघर हो गए हैं. वन विभाग ने प्रभावितों को राहत सामग्री पहुंचाई है.

विज्ञापन

बेतला से संतोष कुमार की रिपोर्ट

आपके शहर में

विज्ञापन

बेतला, लातेहार . लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और मंडल डैम के फाटकों में बड़ी मात्रा में लकड़ी और कचरा फंसने से डैम से पानी की निकासी प्रभावित हो गयी है. पानी रुकने के कारण बैकवाटर तेजी से पीछे की ओर फैल गया है. इससे डूब क्षेत्र के गांवों में अचानक बाढ़ की स्थिति बन गयी है. कई घरों में पानी घुसने से लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है.

700 परिवारों पर खतरा

कुटकू, भजना और खुरा गांव के 36 चिन्हित परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. इन परिवारों के घरों में कई फीट तक पानी भर गया है. पानी घुसने से घर में रखा अनाज, कपड़ा और घरेलू सामान बर्बाद हो गया है. प्रभावित परिवारों ने ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर शरण ली है. ग्रामीणों के अनुसार, अगर पानी की निकासी जल्द शुरू नहीं हुई, तो क्षेत्र के 700 से अधिक अन्य परिवारों पर भी बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है.

जंगलों से बहकर आया मलबा

लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी और जंगलों से बहकर आयी लकड़ियां, पेड़ों के तने और अन्य मलबा मंडल डैम के बहाव क्षेत्र और फाटकों में फंस गया है. इससे पानी की निकासी बाधित हो गयी है. पानी रुकने से जलस्तर तेजी से बढ़ा और बैकवाटर कुटकू, भजना और खुरा जैसे तटीय गांवों की ओर फैल गया. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते फाटकों और जलमार्ग से लकड़ियों व मलबे को नहीं हटाया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.

हाई अलर्ट पर इको विकास समितियां

बारिश के बीच बाढ़ का खतरा देखते हुए क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गयी है. रात के समय अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए इको विकास समितियों के सदस्य लगातार निगरानी कर रहे हैं.

वन विभाग की ओर से भी प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. ग्रामीणों को जलभराव और डूब क्षेत्र वाले संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गयी है.

परिवारों को राहत सामग्री

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पीटीआर के उप निदेशक प्रजेश कांत जेना के निर्देश पर मदगड़ी स्थित कुटकू वन प्रक्षेत्र कार्यालय परिसर में आपात राहत शिविर लगाया गया. यहां कुटकू, भजना और खुरा गांव के 36 अत्यधिक प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री दी गयी.

ये भी पढ़ें: मां की मौत के बाद अनाथ हुई 6 माह की नन्हीं हथिनी राखी, अब बनी बेतला की धड़कन

प्राथमिक उपचार किट

प्रभावित परिवारों के बीच प्राथमिक उपचार किट, राशन, तिरपाल और मच्छरदानी जैसी जरूरी सामग्री बांटी गयी. राहत वितरण के दौरान प्रभारी वनपाल आलोक कुमार पाठक, प्रधान वनरक्षी संतोष कुमार, वनरक्षी उमेश उरांव और इको विकास समिति के सदस्य मौजूद रहे.

वन विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में हर संभव प्रशासनिक और जमीनी मदद उपलब्ध करायी जायेगी.

ये भी पढ़ें: लातेहार में लगातार बारिश सेआम जनजीवन अस्त-व्यस्त - बहेराटांड़ और मनिका में गिरे मिट्टी के मकान

सात गांवों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू

मंडल डैम के डूब क्षेत्र में आने वाले सात गांवों के स्वैच्छिक पुनर्वास की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी है. प्रभावित परिवारों को बिश्रामपुर में व्यवस्थित तरीके से बसाने की तैयारी की जा रही है. प्रशासन की योजना के अनुसार, पुनर्वास के बाद परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जायेगा. ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी पुनर्वास होने से भविष्य में मंडल डैम के कारण होने वाली बाढ़ और विस्थापन की समस्या से राहत मिल सकती है.

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola