कैसे होगी पढ़ाई-लिखाई

Updated at : 10 Apr 2015 9:26 AM (IST)
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कैसे होगी पढ़ाई-लिखाई

चंदवा : शहर से सटे परशही (कामता) में नव निर्मित व निर्माणाधीन जगत मोहन जगधात्री नाथ महाविद्यालय का भवन कोल डस्ट की जद में आ गया है. झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद को त्रहिमाम संदेश भेजा गया है. बावजूद स्थिति यथावत है. रेल लाइन के किनारे स्थित टोरी कोल साइडिंग में कोयला का विशाल भंडार […]

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चंदवा : शहर से सटे परशही (कामता) में नव निर्मित व निर्माणाधीन जगत मोहन जगधात्री नाथ महाविद्यालय का भवन कोल डस्ट की जद में आ गया है. झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद को त्रहिमाम संदेश भेजा गया है. बावजूद स्थिति यथावत है. रेल लाइन के किनारे स्थित टोरी कोल साइडिंग में कोयला का विशाल भंडार है.
यहां आम्रपाली, अशोका, पीपरवार व तेतरियाखाड़ कोल प्रोजेक्ट का कोयला डंप किया जा रहा है. करीब 75 हजार टन कोयला का भंडार है. कोल डंप व कॉलेज के बीच महज 150 मीटर का फासला रह गया है. उड़ते कोल डस्ट से कॉलेज भवन की रंगत बदलती जा रही है. ऐसे में नामांकन के बाद बच्चों के अध्यापन पर सवाल खड़ा हो गया है. अभिभावकों समेत क्षेत्र वासियों ने जन प्रतिनिधियों व जिला प्रशासन से अविलंब कोल डंप हटाने की मांग की है.
भवन निर्माण मद में 60 लाख रुपये का व्यय : चंदवा. जेएमजेएन कॉलेज में तत्कालीन सांसद इंदर सिंह नामधारी द्वारा अपने कोटे से 15 लाख रुपये की लागत पर तीन हॉल व बरामदा का निर्माण वर्ष 2012-13 में कराया गया था. इसके समीप ही तत्कालीन विधायक बैजनाथ राम द्वारा भी 15 लाख रुपये की लागत से तीन हॉल व बरामदा निर्माण का काम पूर्ण कर लिया गया है.
वर्तमान में जिला परिषद लातेहार द्वारा तीस लाख रुपये की लागत से भवन निर्माण कार्य प्रगति पर है. कुल मिला कर भवन निर्माण मद में 60 लाख रुपये खर्च किये गये हैं. कोयला साइडिंग से उड़ते धूल कण के कारण इसका वजूद खतरे में आ गया है. बताते चलें कि कॉलेज के उत्तर दिशा में टोरी कोल साइडिंग व रेल लाइन, दक्षिण में तिलैयाटांड़ व पतराटोली मुहल्ला, पूरब में टोरी-लोहरदगा निर्माणाधीन रेल लाइन व पमि में जगराहा डैम, अलौदिया नाला व एनएच-99 अवस्थित टोरी लेवल क्रॉसिंग है
टोरी इस्टेट द्वारा राज्यपाल को कॉलेज निर्माण हेतु दान स्वरूप 12.5 एकड़ भूमि दी गयी थी. पास में दूसरा कोल साइडिंग का निर्माण भी कराया जा रहा है. पूर्व में तत्कालीन सांसद उपेंद्र नाथ वर्मा ने महाविद्यालय के तत्कालीन सचिव के आग्रह पर अपने कोटे से सर्वप्रथम भवन निर्माण कराया था. फिलवक्त यह भवन धराशायी होने के कगार पर है.
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