सुबह उठने के साथ पानी के लिए लग जाती है लाइन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Oct 2019 1:13 AM
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महुआडांड़ : प्रखंड स्थित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय में आदिम जनजाती और आदिवासी छात्राएं मूलभूत सुविधाओं की कमी के बीच रहती हैं. विद्यालय में पीने के पानी से लेकर शौचालय तक की कमी के कारण छात्राओं को सुबह उठने के साथ ही रोजाना परेशान होना पड़ता है. यही नहीं विद्यालय में 175 छात्राओं को पढ़ाने […]
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महुआडांड़ : प्रखंड स्थित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय में आदिम जनजाती और आदिवासी छात्राएं मूलभूत सुविधाओं की कमी के बीच रहती हैं. विद्यालय में पीने के पानी से लेकर शौचालय तक की कमी के कारण छात्राओं को सुबह उठने के साथ ही रोजाना परेशान होना पड़ता है. यही नहीं विद्यालय में 175 छात्राओं को पढ़ाने के लिए भी शिक्षकों की कमी है. मात्र तीन शिक्षक के भरोसे इन छात्राओं का भविष्य है.
सरकार ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में बालिका आवासीय विद्यालय की स्थापना की थी. इस विद्यालय में वैसे छात्रों का नामांकन किया जाता है जो 14 वर्ष आयु पूरी कर अभाव के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं. प्रखंड के बुनियादी विद्यालय (बेसिक स्कूल) को रामपुर विद्यालय में मर्ज कर दिया गया था. वर्तमान में बुनियादी विद्यालय के भवन में बालिका आवासीय विद्यालय का संचालन होता है.
रात में मोमबत्ती व लालटेन है सहारा : बालिका आवासीय विद्यालय में बिजली का कनेक्शन है लेकिन प्रखंड में विद्युत आपूर्ति अनियमित रहती है. ऐसे में रात में बिजली कट जाने पर अक्सर छात्राओं को मोमबत्ती व लालटेन का सहारा लेना पड़ता है. विद्यालय में न तो जेनरेटर न ही सोलर लाइट की व्यवस्था है.
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